रक्षाबंधन का पर्व शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा
रक्षाबंधन पर लगने वाला चंद्र ग्रहण भारत में मान्य नहीं होगा....

www.csnn24.com| श्रावण पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त 2026 को सुबह 8:31 बजे शुरू होगी और 28 अगस्त 2026 को सुबह 9:18 बजे तक रहेगी | इसलिए रक्षाबंधन का पर्व शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा | पंचांग के अनुसार, 27 अगस्त को सुबह 8:31 बजे से रात 8:54 बजे तक भद्रा रहेगी | यानी 27 अगस्त की रात 8:54 बजे भद्रा समाप्त हो जाएगी | वहीं, 28 हीं अगस्त को रक्षाबंधन के समय भद्रा नहीं रहेगी | इसलिए इस साल राखी बांधने के लिए भद्रा समाप्त होने का इंतजार करने की जरूरत नहीं होगी | दरअसल, 28 अगस्त को पूर्णिमा सुबह 9:18 बजे तक रहेगी और इस दौरान भद्रा नहीं है. इसलिए रक्षाबंधन के लिए भद्रा की बाधा नहीं मानी जाएगी | शास्त्रीय रूप से भी रक्षाबंधन को भद्रा रहित पूर्णिमा में मनाने की बात कही गई है | इसका अर्थ है कि पर्याप्त समय तक रहने वाली भद्रा रहित पूर्णिमा में रक्षाबंधन करना चाहिए |
क्या रहेगा राखी बांधने का मुहूर्त ?
रक्षाबंधन पर राखी बांधने का सबसे खास और शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 57 मिनट से लेकर सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगा | अगर किसी कारणवश ये मुहूर्त छूट जाए तो अभिजीत मुहूर्त में भी राखी बांधी जा सकती है | उस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 56 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 48 मिनट तक रहेगा |
भद्रा को इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है?
हिंदू पंचांग में समय को अलग-अलग करणों में बांटा गया है| इन्हीं में से विष्टि करण को भद्रा कहा जाता है| धार्मिक मान्यताओं में भद्रा को उग्र प्रकृति वाला समय माना गया है | इसलिए विवाह, गृह प्रवेश, यज्ञ, उपनयन जैसे कई मांगलिक कार्यों में भद्रा का विचार किया जाता है| रक्षाबंधन में भी भद्रा की स्थिति को महत्वपूर्ण माना जाता है | लेकिन इस बार स्थिति अलग है | 27 अगस्त को भद्रा है, जबकि 28 अगस्त को रक्षाबंधन के समय भद्रा नहीं होगी | इसलिए 28 अगस्त को राखी बांधने में भद्रा की बाधा नहीं रहेगी |
राखी बांधते समय बोलें यह मंत्र
रक्षासूत्र केवल एक धागा नहीं है. यह भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और एक-दूसरे की रक्षा के संकल्प का प्रतीक माना जाता है |
येन बद्धो बलि राजा दानवेंद्रो महाबलः तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥
रक्षा बंधन के दिन होती है श्रवण कुमार की पूजा
उदया तिथि पूर्णिमा है। सौम्या नाम के योग के साथ शुभ दिन भी है। भविष्य पुराण की एक कथा के अनुसार, एक बार देवता और दानवों में बारह वर्ष तक युद्ध हुआ। इस युद्ध में देवता विजयी नहीं हुए, तब हीं बृहस्पति ने देवताओं को सुझाव दिया कि युद्ध रोक देना चाहिए। यह सुनकर इन्द्राणी ने कहा कि मैं कल इंद्र को राखी बांधूंगी। उसके प्रभाव से उनकी रक्षा होगी और वह विजयी होंगे | कहा जाता है कि श्रावण शुक्ल पक्ष के पूर्णिमा को दिन भद्रा वर्जित काल में उन्होंनेन्हों ने रक्षा बांधी थी और उस रक्षा के प्रभाव से इंद्र सहित देवगण विजयी हुए थे। इस दिन श्रवण कुमार की पूजा की जाती है। साथ ही, ऋषिपूजन और उपाकर्म सहित श्रावणी उपाकर्म, रक्षाबंधन, संस्कृत दिवस, सभी कार्य के शुभ मुहूर्त हैं।
रक्षाबंधन पर लगने वाला चंद्र ग्रहण भारत में मान्य नहीं होगा
चंद्र ग्रहण इस साल 28 अगस्त को लग रहा है, लेकिन राखी बांधने को लेकर इस दिन कोई नियम और सूतक
काल नहीं माना जाएगा। इस दिन राखी पर चंद्रग्रहण का कोई असर नहीं होगा





