
www.csnn24.com| सैलाना | रतलाम। रतलाम जिले के सैलाना क्षेत्र में आवारा कुत्तों को कथित रूप से बिना वैध अनुमति पकड़ने और उन्हें छोड़ने के बदले धन लेने का मामला सामने आया है। इस संबंध में थाना सैलाना के थाना प्रभारी को विस्तृत शिकायत देकर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने और निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। शिकायत की प्रतिलिपि पुलिस अधीक्षक, कलेक्टर, मुख्य नगर पालिका अधिकारी तथा मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी को भी भेजी गई है।
रात में क्रुरता से पकड़ रहे थे आवारा कुत्तों को
शिकायत के अनुसार, श्री संदीप दुलगंज और उनके कुछ साथी बिना किसी वैध शासकीय अनुमति, नगर परिषद द्वारा जारी टेंडर, वर्क ऑर्डर या अधिकृत Animal Birth Control (ABC) Centre की मान्यता के आवारा कुत्तों को लोहे के टोंग (Dog Catching Tong) से पकड़ रहे हैं। आरोप है कि स्थानीय लोगों को यह कहकर भ्रमित किया जा रहा है कि कुत्तों को नसबंदी के लिए ले जाया जा रहा है, जबकि शिकायतकर्ताओं का दावा है कि संबंधित व्यक्तियों के पास इस कार्य के लिए कोई वैध अधिकार नहीं है। यदि उनके पास कोई अनुमति है, तो उसकी जांच कर सत्यता सार्वजनिक करने की मांग भी की गई है।
रतलाम के Pawfhies Animal Rescue Foundation द्वारा आवाज़ उठायी गयी
इस संबंध में पशु प्रेमी, सेवक व Pawfhies फाउंडर आलेख कैथवास ने अपने ग्रुप के साथ मिलकर आवेदन दिया | उनके साथ उनके साथी अमितोज, स्वराज पवार, गरिमा पवार, दीपक बैरागी, शुभम गुप्ता, सनी, देवेश साल्वे मौजूद थे | इन्होने संयुक्त रूप से थाना सैलाना में विस्तृत शिकायत प्रस्तुत कर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने और निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
शिकायत में कहा गया है कि उपलब्ध वीडियो में कुत्तों को लोहे के टोंग से क्रूरता से पकड़ते हुए स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इस प्रकार कुत्तों को पकड़ना उन्हें अनावश्यक पीड़ा, भय और चोट पहुंचाता है, जो Prevention of Cruelty to Animals Act, 1960 की भावना तथा Animal Birth Control Rules, 2023 में निर्धारित मानकों के विपरीत है।

वीडियो व डिजिटल साक्ष्य मौजूद
मामले को और गंभीर बनाते हुए शिकायत में ₹1,000 के UPI भुगतान का स्क्रीनशॉट भी साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया गया है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि यह भुगतान कुत्तों को छोड़ने के संबंध में किया गया था। यदि जांच में यह तथ्य सही पाया जाता है, तो इसे अवैध वसूली और अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के अंतर्गत अपराध मानते हुए कार्रवाई की मांग की गई है।
शिकायत में पुलिस से मांग की गई है कि संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध तत्काल एफआईआर दर्ज कर उनके पास उपलब्ध टेंडर, वर्क ऑर्डर, स्थानीय निकाय की अनुमति, ABC सेंटर की मान्यता सहित सभी दस्तावेजों की जांच की जाए। साथ ही वीडियो, UPI भुगतान, मोबाइल फोन, बैंक खातों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को जब्त कर निष्पक्ष जांच की जाए।
निष्पक्ष जांच की मांग !
इसके अतिरिक्त, यदि किसी कुत्ते को अवैध रूप से कहीं रखा गया है तो उसे तत्काल मुक्त कराकर चिकित्सकीय परीक्षण कराने और नियमों के अनुसार उसके मूल क्षेत्र में छोड़े जाने की भी मांग की गई है। शिकायतकर्ताओं ने जांच पूरी होने तक संबंधित व्यक्तियों द्वारा कुत्तों को पकड़ने की सभी गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाने का आग्रह किया है।
फिलहाल इस मामले में संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यह केवल पशु क्रूरता का मामला नहीं, बल्कि Animal Birth Control व्यवस्था को दरकिनार कर निजी स्तर पर कुत्तों को पकड़ने और कथित रूप से धन लेकर छोड़ने जैसे गंभीर आरोपों से जुड़ा विषय है। अब सभी की निगाहें प्रशासन और पुलिस की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
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