
www.csnn24.com| गणेश चतुर्थी हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह दिन भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन घरों और सार्वजनिक पंडालों में गणपति बप्पा की मूर्ति स्थापित की जाती है और श्रद्धालु विधि-विधान से उनकी पूजा करते हैं। साल 2026 में गणेश चतुर्थी सोमवार, 14 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। चतुर्थी तिथि 14 सितंबर की सुबह 7:06 बजे शुरू होगी और 15 सितंबर की सुबह 7:44 बजे समाप्त होगी। गणपति स्थापना और पूजा के लिए दोपहर का समय विशेष शुभ माना गया है।
चतुर्थी तिथि का समय:
- चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 14 सितंबर 2026, सुबह लगभग 7:06 बजे
- चतुर्थी तिथि समाप्त: 15 सितंबर 2026, सुबह लगभग 7:44 बजे
- गणपति स्थापना: 14 सितंबर को
- पूजा का प्रमुख समय: मध्याह्न काल – सुबह 11:01 बजे से दोपहर 1:29 बजे तक
इस अवधि में गणपति की स्थापना, प्राण-प्रतिष्ठा और पूजा की जा सकती है। अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और स्थानीय गणना के कारण मुहूर्त कुछ मिनट अलग हो सकता है।
गणपति चतुर्थी का इतिहास और उत्पत्ति : कब और कैसे शुरू हुआ यह पर्व?
गणेश चतुर्थी की धार्मिक परंपरा बहुत पुरानी मानी जाती है। भगवान गणेश को हिंदू धर्म में बुद्धि, विवेक, शुभता और विघ्नहर्ता के रूप में पूजा जाता है।
हालांकि आज जिस भव्य सार्वजनिक गणेशोत्सव को हम देखते हैं, उसका आधुनिक सार्वजनिक स्वरूप मुख्य रूप से महाराष्ट्र में विकसित हुआ। 19वीं सदी के अंतिम दौर में गणेश उत्सव को सार्वजनिक रूप देने में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
इतिहासकारों के अनुसार 1892-93 के आसपास पुणे में सार्वजनिक गणेश स्थापना की परंपरा को बढ़ावा मिला। इसके बाद 1893 में तिलक ने इसे व्यापक सार्वजनिक उत्सव का स्वरूप देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसका उद्देश्य धार्मिक आयोजन के साथ-साथ लोगों को एक मंच पर लाना और सामाजिक एकता को मजबूत करना भी था।
यही वजह है कि गणेश चतुर्थी धीरे-धीरे घरों की पूजा से निकलकर बड़े-बड़े सार्वजनिक पंडालों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सामूहिक उत्सव का रूप लेती गई।
गणेश चतुर्थी का महत्व क्या है? जानें धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यता
भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि गणेश जी की पूजा करने से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और बुद्धि तथा विवेक की प्राप्ति होती है।
गणेश जी के अलग-अलग स्वरूपों का भी विशेष महत्व माना जाता है। उनका बड़ा मस्तक ज्ञान और सोच का प्रतीक माना जाता है, बड़े कान अधिक सुनने का संदेश देते हैं और छोटा मुंह कम बोलने की सीख देता है। भगवान गणेश की स्थापना केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि परिवार में सकारात्मकता, अनुशासन और भक्ति का वातावरण बनाने का अवसर भी है। इस दिन भक्त भगवान गणेश से सुख, शांति, समृद्धि, बुद्धि और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करते हैं।
गणेश जी को क्या चढ़ाएं ? जानें प्रिय फूल, भोग और पूजा सामग्री
भगवान गणेश की पूजा में दूर्वा और मोदक का विशेष महत्व माना जाता है। गणेश जी को लाल फूल भी अर्पित किए जाते हैं। आप गणेश जी को दूर्वा की छोटी-छोटी गांठें, लाल फूल, गुड़, नारियल, केला और मोदक चढ़ा सकते हैं।
गणपति के प्रिय भोग में शामिल हैं:
- मोदक
- लड्डू
- गुड़
- नारियल
- केला
- पंचामृत
- फल
- सूखे मेवे
भोग बनाते समय घर की परंपरा और अपनी धार्मिक मान्यता का ध्यान रखें।
भगवान गणेश से जुड़ी पौराणिक कहानी
गणेश चतुर्थी से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। इनमें भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र गणेश के जन्म की कथा सबसे प्रसिद्ध है।
मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने अपने शरीर के उबटन से एक बालक की रचना की और उसे अपना द्वारपाल बनाया। जब भगवान शिव वहां पहुंचे तो गणेश जी ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। इस बात से भगवान शिव क्रोधित हुए और दोनों के बीच संघर्ष हुआ। अंततः भगवान शिव ने गणेश जी का सिर अलग कर दिया।
माता पार्वती के दुख और क्रोध को देखकर भगवान शिव ने गणेश जी को पुनर्जीवन देने का वचन दिया। इसके बाद उन्हें हाथी का मस्तक लगाया गया और भगवान गणेश के रूप में उनकी पूजा होने लगी। एक अन्य प्रसिद्ध मान्यता के अनुसार गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा को देखने से मिथ्या दोष लगने की कथा भी जुड़ी है।





