तेजा दशमी जुलूस में हंगामा: पुलिसकर्मी को मारा चांटा, थाने पहुंचकर माफी लिखी और छोड़ दिया….

(www.csnn24.com)रतलाम/शिवगढ़। तेजा दशमी के अवसर पर सोमवार को शिवगढ़ में निकले जुलूस के दौरान पुलिस की चेकिंग के बीच विवाद खड़ा हो गया। तलाशी के दौरान एक युवक के पास चाकू मिलने के बाद पुलिस उसे पूछताछ के लिए थाने ले जाने की तैयारी कर रही थी। इसी दौरान उसके साथी मिथुन ने विरोध करते हुए आरक्षक कंवरलाल को चांटा मार दिया। इसके बाद मौके पर पुलिसकर्मियों और युवक के बीच हाथापाई हो गई।
घटना का वीडियो देर रात सामने आया, जिसमें पुलिसकर्मी युवक को काबू करने का प्रयास करते नजर आ रहे हैं। जुलूस के दौरान हुई इस घटना ने पुलिसकर्मियों की सुरक्षा और ड्यूटी के दौरान उनके साथ होने वाले व्यवहार को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
चाकू मिलने के बाद शुरू हुआ विवाद
तेजा दशमी के जुलूस को देखते हुए शिवगढ़ पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिसकर्मियों की तैनाती की थी। जुलूस में शामिल युवकों के एक समूह की तलाशी के दौरान एक युवक के पास चाकू मिलने की बात सामने आई। इसके बाद आरक्षक कंवरलाल और नितेश जाटव युवक से पूछताछ कर रहे थे और उसे थाने ले जाने की तैयारी की जा रही थी।
इसी दौरान उसके साथी मिथुन ने पुलिस कार्रवाई का विरोध किया। कहासुनी बढ़ने पर आरोप है कि मिथुन ने आरक्षक कंवरलाल को चांटा मार दिया। इसके बाद मामला अचानक बिगड़ गया और मौके पर पुलिसकर्मी तथा युवक आपस में उलझ गए।
भीड़ के बीच पुलिसकर्मी और युवक में हाथापाई
पुलिस के अनुसार, विवाद के दौरान युवक ने आरक्षक कंवरलाल का गला पकड़ लिया। आरक्षक ने भी उसे काबू करने का प्रयास किया। इस बीच मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। स्थिति को संभालने के लिए आरक्षक नितेश जाटव ने भीड़ को पीछे हटाया और लोगों से पुलिस कार्रवाई में हस्तक्षेप नहीं करने को कहा।
बाद में पुलिस ने युवक को पकड़कर बाइक पर बैठाने का प्रयास किया। युवक के विरोध के बावजूद पुलिसकर्मियों ने उसे काबू किया और थाने लेकर पहुंचे।
माफी लिखने के बाद छोड़ने पर उठ रहे सवाल
थाना प्रभारी आरएस मकवाना के अनुसार, थाने पहुंचने के बाद मिथुन ने लिखित में माफी मांगी। आरक्षक की ओर से भी घटना को लेकर कोई शिकायत नहीं दी गई। इसके चलते उसके खिलाफ अलग से कार्रवाई नहीं की गई और उसे छोड़ दिया गया। वहीं, जिस युवक के पास से चाकू बरामद हुआ था, उसके खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई की है।
हालांकि, पुलिसकर्मी के साथ ड्यूटी के दौरान मारपीट और हाथापाई जैसी घटना के बाद केवल लिखित माफी लेकर युवक को छोड़ दिए जाने को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। कानून के जानकारों और आम नागरिकों के बीच यह चर्चा का विषय हो सकता है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के साथ अभद्रता या मारपीट के मामलों में क्या स्पष्ट और प्रभावी कार्रवाई होनी चाहिए।
कार्रवाई का संदेश भी जरूरी
पुलिसकर्मी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सार्वजनिक स्थानों पर ड्यूटी करते हैं। यदि ड्यूटी के दौरान किसी पुलिसकर्मी के साथ मारपीट या हाथापाई होती है और मामला केवल माफी मांगने तक सीमित रह जाता है, तो यह पुलिसकर्मियों के मनोबल और भविष्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर सकता है।
स्थानीय स्तर पर यह चिंता भी सामने आ सकती है कि यदि पुलिसकर्मी के साथ मारपीट जैसी घटना में कानूनी प्रक्रिया के बजाय केवल माफीनामा लेकर मामला खत्म किया जाता है, तो इससे भविष्य में कुछ लोगों को पुलिस कार्रवाई का विरोध करने या ड्यूटी पर तैनात जवानों से बदसलूकी करने का गलत संदेश मिल सकता है। ऐसे मामलों में कार्रवाई किस कानूनी प्रावधान के तहत बनती है, यह जांच और उपलब्ध साक्ष्यों पर निर्भर करता है।
फिलहाल घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा में है। एक ओर पुलिस का कहना है कि आरक्षक की ओर से शिकायत नहीं मिलने और आरोपी द्वारा लिखित माफी मांगने के कारण अलग कार्रवाई नहीं की गई, वहीं दूसरी ओर यह घटना पुलिसकर्मियों की सुरक्षा और ड्यूटी के दौरान उनके सम्मान से जुड़े गंभीर सवाल भी छोड़ गई है।





