चैत्र नवरात्रि के कल पहले दिन जानें घटस्थापना का मुहूर्त
विधि और संपूर्ण जानकारी, यहां जानें

नवरात्रि देवी दुर्गा की पूजा करने के लिए भारत में मनाया जाने वाला बहुत ही शुभ त्योहार है। साल में चार बार नवरात्रि आती है। यह माघ, चैत्र, आषाढ़, आश्विन/शारदिया के महीने में प्रतिपदा से नवमी तक मनाया जाता है। इन चार नवरात्रि में चैत्र और शारदीय नवरात्रि को प्रत्यक्ष नवरात्रि तथा माघ और आषाढ़ नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि माना जाता है। दसवें दिन को दशहरा के नाम से जाना जाता है।

चैत्र नवरात्रि 2023 , 22 मार्च यानि बुधवार 2023 से शुरु हो रहे हैं | कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त इस वर्ष 22 मार्च 2023 को सुबह 06 बजकर 29 मिनट से सुबह 07 बजकर 39 मिनट है. सही समय पर कलश स्थापित करने से सारी समस्याओ का अंत होता है और घर में सुख-शांति बनी रहती है |
इस साल चैत्र नवरात्रि 22 मार्च 2023 से प्रारंभ हो रहे हैं और इस शुभ अवसर पर मां दुर्गा नौका पर सवार होकर आ रही हैं | नाव जल परिवहन का साधन है | ज्योतिषियों की मानें तो मां दुर्गा जब नाव पर आती हैं तो यह अच्छी बारिश और अच्छी फसल का संकेत होता है | नौका वाहन के साथ मां दुर्गा का आगमन इस बात का संकेत होता है कि आदी शक्ति आपको मनोवांछित फल देने वाली है |
- चैत्र नवरात्रि प्रथम दिन (22 मार्च 2023) – प्रतिपदा तिथि, मां शैलपुत्री पूजा, घटस्थापना
- चैत्र नवरात्रि दूसरा दिन (23 मार्च 2023) – द्वितीया तिथि, मां ब्रह्मचारिणी पूजा
- चैत्र नवरात्रि तीसरा दिन (24 मार्च 2023) – तृतीया तिथि, मां चंद्रघण्टा पूजा
- चैत्र नवरात्रि चौथा दिन (25 मार्च 2023) – चतुर्थी तिथि, मां कुष्माण्डा पूजा
- चैत्र नवरात्रि पांचवां दिन (26 मार्च 2023) – पंचमी तिथि, मां स्कंदमाता पूजा
- चैत्र नवरात्रि छठा दिन (27 मार्च 2023) – षष्ठी तिथि, मां कात्यायनी पूजा
- चैत्र नवरात्रि सातवां दिन (28 मार्च 2023) – सप्तमी तिथि, मां कालरात्री पूजा
- चैत्र नवरात्रि आठवां दिन (29 मार्च 2023) – अष्टमी तिथि, मां महागौरी पूजा, महाष्टमी
- चैत्र नवरात्रि नवां दिन (30 मार्च 2023) – नवमी तिथि, मां सिद्धीदात्री पूजा, दुर्गा महानवमी, राम नवमी
भारत में नवरात्रि उत्सव के 9 दिनों के दौरान आदिशक्ति दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। मां के इन नौ रूपों को ‘नवदुर्गा’ के नाम से जाना जाता है। नवरात्रि के 9 दिनों में मां दुर्गा के जिन 9 रूपों की पूजा की जाती है, उनके अलग-अलग स्वरूप और महत्व हैं | नवरात्र में व्रत-पूजा की तरह ही भोग का भी बहुत महत्व होता है. मां के नौ रूपों को कौन-से नौ भोग लगाने चाहिए, आइए जानते हैं –





