निगम का सिस्टम लाचार, सभी नपुंसक हो गए… मैं चिंता न करूं तो निगम लाशों का ढेर है” : महापौर प्रहलाद पटेल….
लक्कड़पीठा फोरलेन का सालभर से अधूरा निर्माण बना विवाद की वजह, रहवासियों ने दुकानें बंद कर पुलिया पर किया चक्काजाम; कमिश्नर का अल्टीमेटम—58 दिन में काम पूरा नहीं हुआ तो नौकरी छोड़ दूंगा....

(www.csnn24.com) रतलाम। लक्कड़पीठा फोरलेन के अधूरे निर्माण को लेकर बुधवार को रहवासियों का आक्रोश सड़क पर उतर आया। धूल-मिट्टी और खुदाई से परेशान लोगों ने दुकानें बंद कर पुलिया पर चक्काजाम कर दिया। मौके पर पहुंचे महापौर प्रहलाद पटेल ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर तीखी नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने कहा, “नगर निगम का सिस्टम लाचार है, सभी नपुंसक हो गए। मैं निर्माण कार्य की चिंता न करूं तो निगम लाशों का ढेर है। न आफ्को चिंता है, न इंजीनियरों को। जनता का प्रतिनिधि हूं, इसलिए जनता के सामने बोल रहा हूं।” उन्होंने कहा कि 400 करोड़ के विकास कार्य धरातल पर ऐसे ही नहीं उतर के आए हैं हम मेरी जनप्रतिनिधियों की मेहनत है। महापौर ने यह भी बोला कि यदि ठेकेदार समय पर काम नहीं करता है तो ऐसी फाइल बनाऊंगा की जिंदगी भर काम नहीं कर पाएगा। ठेकेदार का बोलना है कि डामर के दाम बढ़ गए हैं तो महापौर का कहना था कि उसने बहुत कमाया है यदि दाम बढ़ गए हैं तो भी उस काम करना पड़ेगा यदि दाम घट जाते तो क्या वह टेंडर की राशि या कार्य की राशि कम कर देता।
डिवाइडर और फुटपाथ का काम अब तक शुरू नहीं
लक्कड़पीठा फोरलेन का निर्माण करीब एक साल से अधूरा है। ठेकेदार व्यंकटेश तिमन्ना के काम की गति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। डिजाइन फाइनल होने के बावजूद डिवाइडर और फुटपाथ का काम शुरू नहीं हुआ। बिजली के पोल शिफ्ट करने से जुड़ी फाइल भी करीब तीन महीने तक अटकी रही। इस देरी के कारण क्षेत्र के रहवासियों को धूल-मिट्टी और खुदाई से लगातार परेशानी हो रही है।
दुकानें बंद कर सड़क पर उतरे रहवासी
बुधवार सुबह लोगों का सब्र जवाब दे गया। रहवासियों ने एकजुट होकर दुकानें बंद कीं और पुलिया पर चक्काजाम कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। उनकी मांग थी कि यदि ठेकेदार समय पर काम नहीं कर पा रहा है तो उसे ब्लैकलिस्ट कर किसी दूसरे ठेकेदार से निर्माण कराया जाए।
सूचना मिलने पर नगर निगम कमिश्नर अनिल भाना इंजीनियरों के साथ मौके पर पहुंचे। इसके बाद महापौर प्रहलाद पटेल भी वहां पहुंचे। रहवासियों ने उनके सामने अपनी परेशानी रखते हुए निर्माण में हो रही देरी पर नाराजगी जताई।
महापौर ने अधिकारियों को लगाई फटकार
मौके पर निर्माण कार्य की धीमी गति और अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर महापौर ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने सवाल उठाया कि डिजाइन फाइनल होने के बावजूद डिवाइडर और फुटपाथ का काम क्यों शुरू नहीं हुआ और बिजली पोल शिफ्टिंग की फाइल महीनों तक क्यों अटकी रही। महापौर ने निगम के अधिकारियों और इंजीनियरों को काम में तेजी लाने की हिदायत दी।
कमिश्नर ने तय की 58 दिन की समयसीमा
लंबी चर्चा के बाद कमिश्नर अनिल भाना ने निर्माण कार्य पूरा करने के लिए 58 दिन की समयसीमा तय की। उन्होंने कहा कि दीपावली के आठ दिन सहित कुल 58 दिन में काम पूरा कर दिया जाएगा। साथ ही उन्होंने स्पष्ट कहा कि तय समय में काम पूरा नहीं हुआ तो वे नौकरी छोड़ देंगे।
अब रहवासियों को इंतजार है कि इस बार तय समयसीमा में निर्माण पूरा होता है या नहीं। लोगों की मांग साफ है—उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि अधूरी सड़क, धूल-मिट्टी और खुदाई से जल्द राहत चाहिए।





