15 अगस्त 2026 को अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है भारत
1947 में ब्रिटिश शासन से मिली स्वतंत्रता के 79 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है...

www.csnn24.com| आज भारत अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाएगा | इसे लेकर अक्सर लोगों के मन में सवाल रहता है कि देश को आजादी मिले 79 साल हुए हैं, तो स्वतंत्रता दिवस 80वां कैसे हो गया | दरअसल, 15 अगस्त 1947 को भारत का पहला स्वतंत्रता दिवस मनाया गया था, इसलिए 2026 में स्वतंत्रता दिवस की संख्या 80वीं होगी | यह दिन देश की आजादी, संघर्ष और उन वीरों के बलिदान को याद करने का अवसर है, जिन्होंने स्वतंत्र भारत का सपना देखा था |
प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने पहली बार तिरंगा फहराया !
15 अगस्त 1947 को करीब 200 साल लंबे ब्रिटिश शासन का अंत हुआ और भारत स्वतंत्र राष्ट्र बना | सत्ता हस्तांतरण के लिए 15 अगस्त की तारीख पहले से तय नहीं थी, बल्कि बाद में इसे निर्धारित किया गया |आजादी के बाद से दिल्ली का लाल किला स्वतंत्रता दिवस का सबसे बड़ा प्रतीक बन गया | 15 अगस्त 1947 को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने यहां पहली बार तिरंगा फहराया था | आज भी स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले पर प्रधानमंत्री तिरंगा फहराते हैं और देश को संबोधित करते हैं | इस दौरान गार्ड ऑफ ऑनर, राष्ट्रगान और तोपों की सलामी जैसे कार्यक्रम भी होते हैं | 15 अगस्त और 26 जनवरी को लेकर भी अक्सर भ्रम रहता है | 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ था, जबकि 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के साथ भारत एक गणराज्य बना |
‘ट्रिस्ट विद डेस्टिनी’ याद रखा जाता है
भारतीय तिरंगे के बीच में बना अशोक चक्र भी खास संदेश देता है | इसमें 24 तीलियां हैं, जो निरंतर आगे बढ़ते रहने का संदेश देती हैं | 15 अगस्त का महत्व केवल भारत तक सीमित नहीं है | दक्षिण कोरिया के लिए भी यह दिन खास है, इसी दिन उसे जापानी शासन से मुक्ति मिली थी | आजादी की रात जवाहरलाल नेहरू ने अपना ऐतिहासिक भाषण ‘ट्रिस्ट विद डेस्टिनी’ दिया था | यह भाषण भारत की आजादी के इतिहास में हमेशा याद किया जाता रहेगा |
हालांकि आजादी का यह सफर आसान नहीं था | देश के विभाजन के साथ लाखों लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा | विस्थापन और पुनर्वास की बड़ी चुनौती सामने आई | इसलिए स्वतंत्रता दिवस खुशी के साथ उन मुश्किल दिनों और बलिदानों को याद करने का भी अवसर है |
लाल किले को चुनने का लिया गया फैसला
पहली बार जब देश ने आजादी दिवस मनाया था तो राजधानी में इंडिया गेट के पास स्थित प्रिंसेस पार्क में अंग्रेजों का झंडा उतारकर पहली बार तिरंगा झंडा फहराया गया था। इसके बाद इस जगह को बदलने का फैसला लिया गया, इसके पीछे की वजह प्रिंसेस पार्क का ब्रिटिश शासन से कनेक्शन था। अब ऐसी जगह की तलाश थी जिसकी एक ऐतिहासिक पहचान हो।
लाल किला को इसलिए ध्वजारोहण के लिए चुना गया क्योंकि यह किला इतिहास में सत्ता के केंद्र रहा है। इसे साल 1648 में मुगल बादशाह ने बनवाया था, जिसने मुगल काल, ब्रिटिश काल और आजादी का समय, इतिहास के तीनों ही बदलावों के दौर को देखा है। फिर आजादी के बाद देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने पहली बार लाल किले पर तिरंगा फहराते हुए देश को संबोधित किया। इसके बाद से ही इस परंपरा को फॉलो किया जाता रहा है।
सिर्फ एक राष्ट्रीय अवकाश नहीं…
15 अगस्त सिर्फ एक राष्ट्रीय अवकाश नहीं है | यह उन सभी स्वतंत्रता सेनानियों को याद करने का दिन है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए संघर्ष किया और अपना जीवन न्योछावर कर दिया | इसलिए जब भी तिरंगा दिखाई दे, उसके रंगों के साथ उस संघर्ष और बलिदान की कहानी को भी याद करना चाहिए |




