Maha Shivaratri 2026 : 15 फरवरी को मनाई जाएगी महाशिवरात्रि
शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं और क्या नहीं ?

www.csnn24.com| साल 2026 में 15 फरवरी, रविवार को मनाई जाने वाली महाशिवरात्रि सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि साधना, संयम और शिवत्व को भीतर महसूस करने का अवसर है | यह दिन शिव भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इस शुभ अवसर पर भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि, इस दिन शिवलिंग पर बेलपत्र, दूध, शहद और चंदन लगाने से साधक के दुखों का अंत होता है। साथ ही जलाभिषेक करने से महादेव शीघ्र प्रसन्न होकर अपनी कृपा बरसाते हैं। शास्त्रों में महाशिवरात्रि को शिव और पार्वती के मिलन का प्रतीक माना गया है। इसलिए इस खास उपलक्ष्य में देशभर के मंदिरों में शिव बारात और रात्रि जागरण का आयोजन किया जाता है।
महाशिवरात्रि 4 प्रहर पूजा मुहूर्त
रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय – शाम 06:39 से 09:45
रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय -शाम 09:45 से 12:52
रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय – सुबह 12:52 से 03:59
रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय – सुबह 03:59 से 07:06
महाशिवरात्रि 2026 विशेष संयोग
- सुबह 7 बजे से शाम 7 बजकर 48 तक सर्वार्थ सिद्धि योग।
- उत्तराषाढा नक्षत्र शाम 7 बजकर 48 तक।
- श्रवण नक्षत्र 16 फरवरी को 8 बजकर 47 तक।
- व्यतीपात योग पूरे दिन।
- अमृतकाल दोपहर 12:59 से 14:41 तक रहेगा।
- अमृत योग, बुधादित्य योग
पूजन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त:-प्रातः काल 5:21 से लेकर 6:15 तक
- अभिजीत मुहूर्त:-दोपहर 12:13 से लेकर 12:57 तक
चार प्रहर की पूजा में मंत्र जाप
प्रथम प्रहर का मंत्र- ‘ह्रीं ईशानाय नमः’
दूसरे प्रहर मंत्र- ‘ह्रीं अघोराय नम:’
तीसरे प्रहर मंत्र- ‘ह्रीं वामदेवाय नमः’
चौथे प्रहर मंत्र- ‘ह्रीं सद्योजाताय नमः
महाशिवरात्रि पूजा विधि
- महाशिवरात्रि पूजन के लिए सबसे पहले शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शक्कर, घी और गन्ने के रस से अभिषेक करें।
- अब आप कुछ बेलपत्र लेकर ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप कर लें और इसे प्रभु को अर्पित कर दें।
- महादेव को भांग और आक के फूल, धतूरा व शमी का फूल चढ़ाएं।
- अब शिवलिंग पर चंदन लगाएं और त्रिपुंड बना लें।
- शिव जी को बेर, फल, मिठाई फूल आदि सामान अर्पित कर दें।
- घी का एक दीप जलाकर शिवलिंग के सामने रखें और ॐ पार्वतीपतये नमः का जाप करें।
- देवी पार्वती का श्रृंगार से जुड़ी चीजें आप चढ़ा सकते हैं।
- भोलेनाथ भगवान की चालीसा पढ़ें और धूप जला लें।
- शिव भगवान और और उनके पूरे परिवार की आरती करें।
- अंत में क्षमा प्रार्थना करें और अपनी क्षमता के अनुसार दान करें।
शिवलिंग पर भूलकर भी न चढ़ाएं ये चीजें
- तुलसी का पत्ता
- कुमकुम
- टूटे चालव
- हल्दी
- केतकी, केवड़ा, चंपा, चमेली और कनेर के फूल
- शंख का जल
- नारियल (साबू)
- पीतल के पात्र से जल अर्पित न करें, हमेशा तांबे, चांदी या कांसे के पात्र





