रतलाम में अब बदली तस्वीर: जुलवानिया ABC सेंटर में चल रहा व्यवस्थित नसबंदी और वैक्सीनेशन का काम
Friendicoes SECA दिल्ली ने संभाला हुआ है टेंडर

www.csnn24.com| रतलाम | शहर के एकमात्र जुलवानिया एबीसी सेंटर में Friendicoes SECA Delhi द्वारा टेंडर संभालने के बाद नगर के Animal Birth Control (ABC) प्रोग्राम की तस्वीर तेज़ी से बदलती दिखाई दे रही है। जिन कार्यों को पहले लंबे समय तक नजरअंदाज किया जाता था — जैसे आवारा कुत्तों की नसबंदी (Sterilization) और एंटी-रेबीज वैक्सीनेशन (Vaccination)— अब वे नियमित रूप से किए जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले कई बार शिकायतें होती थीं कि ABC सेंटर में काम की गति बेहद धीमी है। या लापरवाही से काम हो रहा है, नसबंदी अभियान अधूरा रह जाता था, और वैक्सीनेशन की प्रक्रिया भी व्यवस्थित तरीके से नहीं चल पाती थी। इससे शहर में आवारा कुत्तों की संख्या और रेबीज का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा था। यहां तक कि ऑपरेशन भी फेल हो रहे थे, कई बेजुबानों मौत के घाट उतर गए |
लेकिन अब स्थिति में बदलाव दिख रहा है। Friendicoes SECA Delhi की टीम के आने के बाद सेंटर में लगातार ऑपरेशन, वैक्सीनेशन और रेस्क्यू का काम सुचारू रूप से हो रहा है। वर्तमान में कुल 6 लोगों की टीम है – एक वेट, एक पैरावेट, 2 कैचर, 1 ड्राइवर और एक सफ़ाई सहकर्मी और एक प्राइवेट गाड़ी | संसाधन कम लेकिन काम पूरी ईमानदारी से चल रहा है | एक दिन में 15 से 20 कुत्तों को ऑपरेट किया जाता है |

दिन-रात की मेहनत के पीछे की असली कहानी
ABC सेंटर में काम करना सिर्फ “कुत्तों को पकड़ना” या “ऑपरेशन करना” भर नहीं है। इसके पीछे एक लंबी और कठिन प्रक्रिया होती है, जिसे आम लोग अक्सर नहीं देख पाते। टीम के कर्मचारियों को सुबह से देर रात तक अलग-अलग इलाकों में जाकर आवारा कुत्तों को सुरक्षित तरीके से पकड़ना पड़ता है। कई बार कुत्ते घायल होते हैं, आक्रामक होते हैं या भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में छिपे रहते हैं। ऐसे में कर्मचारियों की सुरक्षा भी एक बड़ा मुद्दा बन जाती है।
सेंटर में लाने के बाद उनका स्वास्थ्य परीक्षण, ऑपरेशन, पोस्ट-ऑपरेशन देखभाल और वैक्सीनेशन किया जाता है। ऑपरेशन के बाद कुत्तों को कई दिनों तक निगरानी में रखना पड़ता है ताकि उन्हें संक्रमण न हो। गर्मी, बारिश, संसाधनों की कमी और सीमित स्टाफ के बीच यह काम और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। अभी एक दम स्वच्छ साफ़ माहौल है, बेज़ुबान के लिए कूलर भी लगाये गए हैं | पहले तो ऐसा माहौल था कि आम जन वहां पर नहीं रख सकते थे | बेजुबानों को भी प्यार से रखा जाता है |
लगातार दबाव और शिकायतों का बोझ
ABC सेंटर के कर्मचारियों पर सिर्फ काम का ही नहीं, बल्कि मानसिक दबाव भी लगातार बना रहता है। कई बार लोगों द्वारा CM Helpline पर बिना पूरी जानकारी के शिकायतें दर्ज करा दी जाती हैं, या फिर बिना वजह भी कुत्तों को पकड़ने या रिलोकेट करने के लिए लोग प्रेशर डालते हैं जो कि गैर कानूनी है, कई बार इन कारण से इनकी नौकरी पर भी रिस्क बन जाती हैं |
कुछ शिकायतें वास्तविक होती हैं, लेकिन कई मामलों में सिर्फ व्यक्तिगत नाराजगी या अधूरी जानकारी के आधार पर आरोप लगा दिए जाते हैं। इसका असर सीधे मैदान में काम कर रही टीम पर पड़ता है। कर्मचारियों का कहना है कि एक तरफ उनसे शहरभर के कुत्तों की समस्या तुरंत हल करने की अपेक्षा की जाती है, वहीं दूसरी तरफ सीमित वाहन, स्टाफ और संसाधनों में काम करना पड़ता है।
संवेदनशीलता और सहयोग की जरूरत
पशु विशेषज्ञों का मानना है कि नसबंदी और वैक्सीनेशन जैसे अभियान एक-दो दिन में परिणाम नहीं देते। इसके लिए लगातार मेहनत, समय और जनता के सहयोग की भी जरूरत होती है। यदि नागरिक सही जानकारी दें, घायल पशुओं की सूचना समय पर साझा करें और टीम के काम में सहयोग करें, तो शहर में आवारा कुत्तों की संख्या और रेबीज जैसी समस्याओं को काफ़ी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
कचरा डंपिंग एरिया में बना ABC सेंटर, सबसे बड़ी चुनौती
शहर का ABC सेंटर जिस स्थान पर संचालित हो रहा है, वह भी एक बड़ी समस्या बना हुआ है। सेंटर शहर के कचरा डंपिंग एरिया जुलवानिया में स्थित है, जहां हर समय बदबू, गंदगी और अस्वच्छ वातावरण बना रहता है।
कर्मचारियों को कचरे के ढेरों और दूषित माहौल के बीच घंटों काम करना पड़ता है। ऑपरेशन जैसे संवेदनशील कार्यों के लिए साफ-सुथरा और सुरक्षित वातावरण जरूरी होता है, लेकिन मौजूदा स्थिति में टीम को बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।
बरसात के मौसम में हालात और खराब हो जाते हैं। कीचड़, मच्छर, संक्रमण का खतरा और गंदगी के बीच पशुओं की देखभाल करना कर्मचारियों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। पशु प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ABC सेंटर को किसी बेहतर और स्वच्छ स्थान पर स्थानांतरित किया जाना चाहिए ताकि पशुओं और कर्मचारियों — दोनों की सुरक्षा और स्वास्थ्य बेहतर हो सके।
प्रशासन से सहयोग की उम्मीद
अब हाल ही में वहां नगर निगम द्वारा स्वच्छता अभियान के तहत कचरा ख़त्म करने के लिए आग लगाई गई जो इतनी बुरी तरह फैली कि 3 दिन में भी नहीं बुझी, और धुआं इतना हो गया कि ऑपरेशन थियेटर तक पहुंच गया ! और तो और आग लगने के समय वहां 75 बेज़ुबान भी मौजूद थे, कुछ भी बड़ी घटना हो सकती थी |
ऐसे में जहां एक तरफ़ शहर के महापौर जी की रील वायरल हो रही है कि सैलाना–धामनोद मार्ग पर एक चयनित भूमि का निरीक्षण कर आवारा एवं आक्रामक कुत्तों की समस्या के स्थायी समाधान हेतु शहर में आधुनिक डॉग शेल्टर हाउस निर्माण किया जायेगा | तो उनसे ये उम्मीद और अपेक्षा है कि पहले से ही जो शहर में एक मात्र सेंटर मौजूद है उसकी गत सुधारी जाए, उसका विकास भी हो |
शहर में अब धीरे-धीरे बदलाव दिखाई दे रहा है। लेकिन इस बदलाव के पीछे ABC सेंटर के कर्मचारियों की दिन-रात की मेहनत, दबाव और संघर्ष भी उतना ही बड़ा सच है, जिसे प्रशासन एवं आम जन को समझना जरूरी है !





