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जेल की दीवारों के बीच अपनों की याद: बंदियों ने किया पितरों का तर्पण….

घर नहीं जा सकते थे, गया जी और उज्जैन के सिद्धवट जाना भी संभव नहीं था, इसलिए जेल परिसर में ही कराई गई तर्पण की व्यवस्था....

Publish Date: October 2, 2026

(www.csnn24.com) रतलाम। पितृपक्ष का समय आते ही हर परिवार में अपने पूर्वजों की याद ताजा हो जाती है। लोग अपने पितरों को श्रद्धापूर्वक याद करते हैं, उनके निमित्त तर्पण करते हैं और परिवार की सुख-शांति की कामना करते हैं। लेकिन उन लोगों की स्थिति अलग होती है, जो किसी कारण जेल में बंद हैं। उनके लिए चाहकर भी घर लौटना, परिवार के साथ बैठकर पितरों का तर्पण करना या किसी धार्मिक स्थल पर जाकर यह परंपरा निभाना संभव नहीं होता।

रतलाम सर्किल जेल में बंद कुछ बंदियों के सामने भी ऐसी ही स्थिति थी। कोई अपने परिवार से दूर है तो कोई ऐसे समय जेल में है, जब उसके किसी अपने या पूर्वज का निधन हो गया। मन में इच्छा होने के बावजूद वे अपने घर नहीं जा सकते। गया जी जाकर पिंडदान या उज्जैन के सिद्धवट पर तर्पण करना भी उनके लिए संभव नहीं है।

इन्हीं भावनाओं को समझते हुए रतलाम सर्किल जेल प्रशासन ने एक संवेदनशील पहल की। जेल की चारदीवारी के भीतर ही बंदियों के लिए पितरों के तर्पण की व्यवस्था कराई गई। जेल अधीक्षक लक्ष्मण सिंह भदौरिया एवं जेल स्टाफ की मौजूदगी में इच्छुक बंदियों ने विधि-विधान के साथ अपने पितरों और पूर्वजों का स्मरण कर तर्पण किया।

घर से दूर थे, लेकिन पितरों को याद करने से कोई नहीं रोक सका

तर्पण के दौरान जेल परिसर का माहौल पूरी तरह श्रद्धा से भरा रहा। अपने पूर्वजों को याद करते हुए बंदियों ने उनके निमित्त तर्पण किया और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। इसके साथ ही उन्होंने अपने परिवार के लोगों के सुखी और स्वस्थ रहने तथा घर में सुख-शांति और समृद्धि की कामना भी की।

जेल में बंद व्यक्ति भले ही अपने घर से दूर हो, लेकिन अपने माता-पिता, दादा-दादी और दूसरे पूर्वजों की याद उससे दूर नहीं हो जाती। कई बार ऐसी धार्मिक परंपराएं ही उन्हें अपने परिवार और अपनों से भावनात्मक रूप से जोड़े रखती हैं। इसी भावना को ध्यान में रखते हुए जेल प्रशासन ने यह व्यवस्था की।

गया जी और सिद्धवट जाना संभव नहीं, इसलिए जेल में ही मिला अवसर

पितरों के तर्पण के लिए गया जी और उज्जैन का सिद्धवट धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। सामान्य परिस्थितियों में लोग इन स्थानों पर जाकर अपने पितरों का तर्पण करते हैं। लेकिन जेल में निरुद्ध बंदियों के लिए वहां जाना संभव नहीं है। वे अपने घर भी नहीं जा सकते, जहां परिवार के साथ मिलकर यह परंपरा निभाई जा सके।

ऐसे में जेल प्रशासन का यह प्रयास बंदियों के लिए भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण रहा। उन्हें जेल परिसर में ही अपने पितरों को श्रद्धांजलि देने और उनकी शांति के लिए प्रार्थना करने का अवसर मिला।

सामूहिक रूप से हुआ तर्पण

कार्यक्रम में जेल के इच्छुक बंदियों के साथ जेल स्टाफ के लोगों ने भी सहभागिता की। सभी ने अपने-अपने पितरों को श्रद्धापूर्वक याद किया और सामूहिक रूप से तर्पण की प्रक्रिया पूरी की।

इस दौरान बंदियों ने केवल अपने पूर्वजों की शांति के लिए ही प्रार्थना नहीं की, बल्कि अपने परिवार के लिए भी सुख, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि मांगी। अपनों से दूर रहने के बावजूद प्रार्थना के इन क्षणों में उनके मन में अपने परिवार की तस्वीरें और उनसे जुड़ी यादें भी जरूर रही होंगी।

युवा सेवा संघ ने कराया आयोजन

जेल परिसर में आयोजित इस तर्पण कार्यक्रम को युवा सेवा संघ के सहयोग से संपन्न कराया गया। संस्था की ओर से आवश्यक धार्मिक व्यवस्था कराई गई और इच्छुक बंदियों को विधि-विधान के साथ तर्पण करने का अवसर दिया गया।

जेल प्रशासन की इस पहल का उद्देश्य यही रहा कि जेल में रहने के कारण कोई बंदी अपने पूर्वजों के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करने से वंचित न रह जाए। कानून और जेल की अपनी व्यवस्थाओं के बीच भी बंदियों की भावनाओं और धार्मिक आस्था का ध्यान रखा गया।

चारदीवारी के भीतर भावनाओं का एक अलग संसार

जेल को आमतौर पर लोग ऊंची दीवारों, सुरक्षा और बंदिशों से जोड़कर देखते हैं। लेकिन इन दीवारों के भीतर रहने वाले लोग भी अपने परिवार, माता-पिता और पूर्वजों से जुड़ी भावनाएं रखते हैं। उनके मन में भी अपनों की याद आती है और वे भी अपने परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।

रतलाम सर्किल जेल में हुआ यह तर्पण कार्यक्रम इसी मानवीय पहलू को सामने लाता है। परिस्थितियों ने बंदियों को अपने घर से दूर जरूर कर दिया, लेकिन अपने पितरों को याद करने और उनके लिए प्रार्थना करने की भावना को कोई दीवार रोक नहीं सकी।

अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के बाद बंदियों ने परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। जेल परिसर में हुआ यह आयोजन उनके लिए केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि अपनों को याद करने, अपनी जड़ों से जुड़ने और मन की भावनाओं को प्रार्थना के रूप में व्यक्त करने का एक अवसर भी बना।

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Amit Nigam

Founder Director Head of CSNN 24 & Bureau chief SWARAJ EXPRESS MP/CG since launching Madhya Pradesh,Bureau chif BS tv mp/cg.. Bureau chief Digiana news indore at Ratlam .. Three times ex Vice President of Ratlam Press Club. DPR Accreditation from MP.Government (Adhimanya Patrakar since 15 yrs).21 years of journalism experience...along with print media & electronic media.... 18 years experience in National & Regional news channels B.SC LLB. MEMBER OF RATLAM BAR COUNCIL

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