Diwali 2025 : दिवाली से पहले क्यों मनाई जाती है काली चौदस ?
घर पर कैसे पूजा, जानिए सही तिथि और पूजा मुहूर्त

दिवाली से एक दिन पहले आने वाली नरक चतुर्दशी, जिसे लोग छोटी दिवाली भी कहते हैं, धार्मिक रूप से बेहद पवित्र मानी जाती है। यह दिन केवल खुशियों और सजावट का नहीं, बल्कि पापों के नाश और मृत्यु के भय से मुक्ति का भी प्रतीक है। मान्यता है कि इस दिन यम देव की पूजा और दीपदान करने से अकाल मृत्यु का भय खत्म होता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
नरक चतुर्दशी को काली चौदस भी कहा जाता है
काली चौदस का उत्सव गुजरात में विशेष श्रद्धा से मनाया जाता है | काली चौदस नकारात्मक शक्तियों से रक्षा पाने का दिन माना जाता है। इस दिन देवी कालरात्रि की पूजा की जाती है, जो माता दुर्गा का एक उग्र रूप हैं और जो अपने भक्तों की रक्षा करती हैं। लोग इस दिन बुरी शक्तियों से बचाव की प्रार्थना करते हैं और अपने घरों को नकारात्मकता से मुक्त करते हैं। कुछ लोग अपने पूर्वजों की आत्माओं को भी याद करते हैं और उन्हें सम्मान देते हैं।
नरक चतुर्दशी की तिथि और शुभ मुहूर्त
द्रिक पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 19 अक्टूबर को दोपहर 01 बजकर 51 मिनट पर शुरू हो रही है, जो 20 अक्टूबर को दोपहर 03 बजकर 44 मिनट पर समाप्त होगी। बता दें कि रूप चौदस का स्नान (अभ्यंग स्नान) सूर्योदय से पहले किया जाता है। इसी के कारण इस साल 20 अक्टूबर को नरक चतुर्दशी मनाई जाएगी। इसके साथ ही यम दीपक 19 और 20 अक्टूबर दोनों ही दिन भी जलाया जा सकता है।
क्यों मनाई जाती है नरक चतुर्दशी ?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, राक्षस नरकासुर ने अपने अत्याचारों से तीनों लोकों में आतंक मचा रखा था। उसके अत्याचारों से देवता और मनुष्य दोनों परेशान थे। चतुर्दशी के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध किया और 16,000 कन्याओं को बंधन से मुक्त कराया।
यम दीपक का महत्व और सही तरीका
नरक चतुर्दशी की पूजा में सबसे खास होता है यम दीपक जलाना। इस दीपक को जलाने के कुछ खास नियम हैं। माना जाता है कि दीपक हमेशा दक्षिण दिशा की ओर जलाना चाहिए क्योंकि यह यमराज की दिशा है। चौमुखी मिट्टी का दीपक सबसे शुभ माना जाता है। इसमें सरसों का तेल डालकर चार बत्तियां लगाई जाती हैं, जो जीवन के चार दिशाओं में प्रकाश फैलाने का प्रतीक है। दीपक जलाने के बाद उसे घर के सभी कोनों में घुमाकर अंत में मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा में रख दिया जाता है, ताकि नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश न कर सके। ऐसा करने से घर में शांति और सुख-समृद्धि आती है।





