
www.csnn24.com| रंगों का त्योहार होली फाल्गुन माह की पूर्णिमा की रात को मनाया जाता है। हालांकि, द्रिक पंचांग के अनुसार, 3 मार्च की शाम को पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा, जिसका सीधा असर धार्मिक पंचांग पर पड़ेगा। ग्रहण के कारण सूतक काल शुरू हो जाएगा, जिसके दौरान धार्मिक अनुष्ठान नहीं किए जाते हैं। होलिका दहन सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में और केवल तभी होना चाहिए जब भद्रा या सूतक काल सक्रिय न हो !
पूर्णिमा तिथि और भद्रा का संयोग
पंचांग के अनुसार, फाल्गुन पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 2 मार्च को शाम 5:18 बजे से हो रही है। इसी समय भद्रा का वास भी शुरू हो जाएगा, जो पूरी रात और अगली सुबह 3 मार्च को 4:56 बजे तक प्रभावी रहेगा। भद्रा काल में कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य करना वर्जित माना गया है। शास्त्रों में भद्रा को अशुभ योग माना गया है। मान्यता है कि भद्रा में किए गए शुभ कार्यों का फल विपरीत हो सकता है। इसी वजह से होलिका दहन हमेशा भद्रा समाप्त होने के बाद या भद्रा पुच्छ काल में ही करना चाहिए।
पुराणों के अनुसार, भद्रा सूर्य देव की पुत्री और शनिदेव की बहन मानी जाती हैं। जब भद्रा पृथ्वी लोक में होती हैं, तो उस समय शुभ कार्य करने से बचने की परंपरा है। मान्यता है कि भद्रा काल में किए गए मांगलिक कार्यों से विघ्न और अशुभ परिणाम मिल सकते हैं। इसी कारण से विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे शुभ कार्यों के साथ-साथ होलिका दहन भी भद्रा में नहीं किया जाता। इस वर्ष चूंकि भद्रा पूरी रात रहेगी, इसलिए केवल भद्रा पुच्छ काल में ही होलिका दहन करना शास्त्रसम्मत माना गया है।
होलिका दहन का शुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस वर्ष होलिका दहन का सबसे उपयुक्त और शास्त्रसम्मत समय 2 मार्च, सोमवार की रात 12:50 बजे से 2:02 बजे के बीच रहेगा। इस दौरान भद्रा का पुच्छ काल माना जा रहा है, जो होलिका दहन के लिए अनुकूल माना जाता है। यह मुहूर्त कुल 1 घंटा 12 मिनट का है।
चार मार्च को खेली जाएगी रंगों वाली होली
पंचांग के अनुसार 3 मार्च को शाम 5 बजकर 8 मिनट तक पूर्णिमा तिथि रहेगी, लेकिन इस बार इसी समय चंद्र ग्रहण का साया भी बना हुआ है। चंद्र ग्रहण दोपहर में 3 बजकर 20 मिनट से शुरू हो जाएगा। साथ ही यह भारत में भी नजर आएगा। जिसके चलते सूतक काल भी मान्य होगा। वहीं, रंग खेलने वाली होली यानी धुलेंडी चैत्र महीने की कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाई जाती है। ऐसे में इस साल रंगोत्सव 4 मार्च को मनाया जाएगा।




