सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार एक बार पुनः सुर्खियों में… आखिर क्यों है उनके दोनों मोबाइल बंद….
राज्यसभा इलेक्शन को लेकर अटकलें तेज....

(www.csnn24.com) रतलाम/सैलाना से भारत आदिवासी पार्टी बाप से जीते हुए निर्दलीय विधायक कमलेश्वर डोडियार एक बार पुनः सुर्खियों में है। इसका कारण है कि उनका मोबाइल विगत दो दिन से बंद आ रहा है ,ऐसा दावा किया जा रहा है। और इस दावे के पीछे यह भी दावा किया जा रहा है कि जिस प्रकार का घटनाक्रम राज्यसभा में चुनाव तथा ओर वोटिंग को लेकर चल रहा है उसमें कमलेश्वर डोडियार का भी महत्वपूर्ण रोल है। ऐसे समय में अफवाहों का जोर तेजी से चल रहा है। जब हमने कमलेश्वर डोडियार के दोनों नंबर पर संपर्क करना चाह तो उनके दोनों नंबर बंद आए। इसके पास साथ जब उनके मित्र चंदू मईड़ा से फोन पर संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि सैलाना विधायक दिल्ली में है तथा वह LLM की परीक्षा देने गए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर भी हमसे बात करने के पश्चात इस प्रकार की पोस्ट शेयर करी है। हालांकि अटकलें का दौर अभी भी जारी है। जिस प्रकार की कमलेश्वर डोडियार की कार्यशैली है उसमें कुछ भी संभव है। 18 तारीख को मतदान होना है और ऐसे में सभी पार्टी अपने विधायकों को लेकर सतर्क है तथा बाड़ बंदी की जा रही है। सबसे ज्यादा चिंता कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग की सता रही है क्योंकि मीनाक्षी नटराजन की उम्मीदवारी की घोषणा के बाद कांग्रेस में भी असंतोष है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता कांतिलाल भूरिया पहले ही आरोप लगा चुके हैं कि 5 से 6 करोड़ में विधायकों की खरीद फरोख्त की जा रही है।

कमलेश्वर डोडियार ने जब 2023 विधानसभा चुनाव लड़ा था तब उन्होंने चंदा लेकर चुनाव लड़ने का दावा किया था। और चुनाव जीतने के पश्चात वह झोपड़ी वाले विधायक के रूप में चर्चित हुए तथा मोटरसाइकिल से सैलाना से भोपाल शपथ विधि के लिए पहुंचे थे यह एक राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया था।

हालांकि चुनाव के पक्ष और चुनाव के दौरान यह भी अफवाहें सामने आई थी की कमलेश्वर डोडियार को बैकग्राउंड में बीजेपी ने सपोर्ट किया था तथा उनकी हर संभव सहायता की गई थी जिससे कि कांग्रेस का गढ़ रहे सैलाना से हर्ष विजय गहलोत का किला ढहाया जा सके। माना जा रहा था कि कमलेश्वर डोडियार कांग्रेस के वोट को डैमेज कर देंगे और भाजपा आसानी से यहां पर जीत जाएगी। परंतु कमलेश्वर डोडियार ने यहां पर अप्रत्यक्षित तरीके से अपनी जीत दर्ज करी।

चुनाव जीतने के पश्चात वह उसे समय भी सुर्खियों में आए थे जब उनकी जीत की घोषणा हुई थी तो उन्होंने रतलाम से विधायक के रूप में जीते हुए चैतन्य काश्यप से सबसे पहले मतगणना स्थल पर आशीर्वाद लिया था। इसके पश्चात उन्होंने प्रदेश भर में बीजेपी के नेताओं से भी मुलाकात करी थी। तथा गृहमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री बनने तक की मंशा जताई थी।

अब एक बार फिर कमलेश्वर डोडियार सुर्खियों और चर्चाओं में है। हमने जब उनके दोनों मोबाइल पर संपर्क करना चाहा तो उनका मोबाइल स्विच ऑफ आया।
उनके सहयोगी तथा साथी चंदू मईड़ा जब उनके बारे में चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि सब अफवाह है विधायक जी दिल्ली में एलएलएम की परीक्षा देने गए हैं तथा 15 16 तारीख को वापस आ जाएंगे। हमसे चर्चा के बाद चंदू महिला ने इस संदर्भ में सोशल मीडिया पर स्पष्टीकरण डाला है।

बहरहाल कमलेश्वर डोडियार का वोट अब बहुत कीमती माना जा रहा है और देखना है कि उनका वोट ?

- मध्य प्रदेश: यहाँ 3 सीटों के लिए चुनाव हो रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तरूण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट को अपना उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस में संभावित क्रॉस-वोटिंग के डर को देखते हुए राजनीतिक चर्चाएं काफी तेज हैं। कांग्रेस की तरफ से मीनाक्षी नटराजन सुर्खियों में है।
- अन्य राज्य: भाजपा ने गुजरात से 4, और राजस्थान से डॉ. अल्का गुर्जर व डॉ. सतीश पूनिया सहित कई वरिष्ठ नेताओं को उम्मीदवार बनाया है।
- पिछले परिणाम: इससे पूर्व मार्च 2026 में हुए चुनाव (जिसमें 10 राज्यों की 37 सीटें शामिल थीं) में एनडीए (NDA) का प्रदर्शन काफी मजबूत रहा था।
-
- मतदान खुला होता है, जहां विधायक को पार्टी के अधिकृत एजेंट को अपना मत दिखाना अनिवार्य होता है।
- यदि वे अपनी पार्टी (भारत आदिवासी पार्टी) के व्हिप (Whip) के खिलाफ किसी अन्य पार्टी (जैसे भाजपा या कांग्रेस) के उम्मीदवार को वोट देते हैं, तो यह Cross-voting (क्रॉस-वोटिंग) कहलाएगा।
- क्रॉस-वोटिंग करने पर उनका वोट रद्द नहीं होगा और पूरी तरह वैध गिना जाएगा।
राज्यसभा चुनाव में किसी भी दल या निर्दलीय उम्मीदवार के पक्ष में कमलेश्वर डोडियार द्वारा दिया गया वोट वैध माना जाएगा।राज्यसभा चुनाव में दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) लागू नहीं होता है। भारत निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार:-हालाँकि, व्हिप का उल्लंघन करने पर उनकी विधायकी (सदस्यता) पर कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन उनकी पार्टी अनुशासनात्मक कार्रवाई (जैसे पार्टी से निष्कासन) जरूर कर सकती है।अब सभी की नजरें कमलेश्वर डोडियार की अगली राजनीतिक चाल पर हैं। क्या वे किसी बड़े राजनीतिक संदेश के साथ लौटेंगे या फिर स्वतंत्र रुख बनाए रखेंगे, इसका जवाब मतदान के दिन ही सामने आएगा। फिलहाल सैलाना से लेकर भोपाल और दिल्ली तक एक ही सवाल गूंज रहा है—
“कमलेश्वर डोडियार का वोट आखिर जाएगा किसके पक्ष में?
सोशल मीडिया पर ट्रोल होने के पश्चात विधायक का पक्ष उन्होंने फेसबुक पर डाला है





