ब्रेकिंग
रतलाम गुरु तेग बहादुर पब्लिक स्कूल का परीक्षा परिणाम शत प्रतिशत.... RCL किक्रेट प्रतियोगिता का भव्य शुभारंमआज.... रॉयल कॉलेज का ऐतिहासिक कीर्तिमान... MBA, BBA और BCA के 10 विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय की प्रावीण्... कैबिनेट मंत्री काश्यप ने प्रदेश अध्यक्ष को जताई शोक संवेदना... हार्टफुलनेस के प्रणेता पद्म भूषण ‘‘दाजी’’ रतलाम में कराएंगे तीर्थंकर ऋषभदेवजी के प्रवर्तित राजयोग पर... ट्रक ड्राइवर की पिट पिट कर हत्या... ट्रक से पानी के छीटे उड़ने पर... शंका में कर दी हत्या... नाबालिक युवती की हत्या... परिजनों ने चार लड़कों पर लगाया आरोप... बच्ची के साथ दुष्कर्म हुआ परिजन भैविन माइंड स्कूल में ‘ओपन हाउस’ व अभिभावक चर्चा आयोजित..... भेविंन माइंड स्कूल... रतलाम के शिक्षा जगत में एक नया अध्याय लिखने को तैयार.... New Delhi में शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं के विचारों से सजी Caste Census and Deepening of Social Justi...
धार्मिक

Sharad Navratri 2025 : शारदीय नवरात्रि 22 सितंबर से शुरू हो रही है और 2अक्टूबर तक विजय दशमी के साथ समाप्त होगी

जानिए घटस्थापना का शुभ मुहूर्त, विधि और माता की सवारी के बारे में ...

Publish Date: September 21, 2025

www.csnn24.com | हर साल अश्विन महीने में शारदीय नवरात्रि आती है।नवरात्रि की शुरुआत अश्विन शुक्ल प्रतिपदा से होती है, जो सर्व पितृ अमावस्या के अगले दिन आती है। इस समय शक्ति की पूजा होती है। शारदीय नवरात्रि को इच्छा पूर्ति और आत्मिक उन्नति का समय है, इस दौरान दुर्गा पूजा और संधि पूजा जैसे विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं। मान्यता है कि इन नौ दिनों में देवी दुर्गा पृथ्वी पर चरण करती हैं और अपने कृपा बरसाती हैं।

शारदीय नवरात्रि 2025 शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, इस साल शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 22 सितंबर 2025, सोमवार को हो रही है। इसका समापन 2 अक्टूबर 2025 को विजय दशमी के साथ होगा। शुक्ल योग 07:58 PM तक, उसके बाद ब्रह्म योग रहेगा।

  • घटस्थापना मुहूर्त- सुबह 6:09 से 8:06 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त- 11:49 से दोपहर 12:38 बजे तक
  • सर्वार्थसिद्धि योग – Sep 21 09:32 AM – Sep 22 06:19 AM

शारदीय नवरात्रि में किस दिन किस देवी की पूजा

इस साल का शारदीय नवरात्र 10 दिन का होगा। ऐसा संयोग 9 साल बाद पड़ा है, जब नवरात्र दस दिन के हो रहेहैं। इससेपहले 2016 मेंनवरात्र दस दिन के थे। इस वजह सेइस साल दो चतुर्थी तिथि पड़ रह है।

  • 22 सितंबर – प्रतिपदा- मां शैलपुत्री
  • 23 सितंबर – द्वितीया- मां ब्रह्मचारिणी
  • 24 सितंबर – तृतीया- मां चंद्रघंटा
  • 25 – 26 सितंबर – चतुर्थी- मां कूष्मांडा
  • 27 सितंबर – पंचमी- मां स्कंदमाता
  • 28 सितंबर – षष्ठी- मां कात्यायनी
  • 29 सितंबर – सप्तमी- मां कालरात्रि
  • 30 सितंबर – अष्टमी- मां महागौरी
  • 1 सितंबर – नवमी- मां सिद्धिदात्री
  • 2 अक्टूबर – व्रत पारण, दुर्गा विसर्जन, विजयदशमी

शारदीय नवरात्रि में माता के आने – जाने की सवारी 

इस साल शारदीय नवरात्रि की शुरुआत सोमवार के दिन से हो रही है। देवी पुराण के श्लोक- ‘शशि सूर्य गजरुढा शनिभौमै तुरंगमे’ के अनुसार जब नवरात्रि की शुरुआत सोमवार या रविवार के दिन होती है तो माता गज यानि हाथी पर सवार होकर आती हैं। यानि साल 2025 में शारदीय नवरात्रि के दौरान भी माता दुर्गा हाथी पर सवार होकर आएंगी।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हाथी पर माता का सवार होकर आना बेहद शुभ संकेत होता है। इसके चलते अच्छी वर्षा होती है और देश-दुनिया पर भी इसका शुभ असर देखने को मिलता है। राजनीतिक स्थिरता दुनिया में देखी जा सकती है। इसके साथ ही लोगों के जीवन में भी अच्छे परिवर्तन इसके चलते आते हैं। हाथी पर सवार माता अपने भक्तों का उद्धार करती हैं।

नवरात्रि का समापन 1 अक्टूबर 2025 को होगा। इस दिन बुधवार है, और नवमी तिथि इस दिन शाम 7 बजकर 2 मिनट तक रहेगी। बुधवार के दिन जब भी माता प्रस्थान करती हैं तो उनकी सवारी हाथी ही होती है। इसे भी शुभ संकेतक माना जाता है। हाथी पर माता का सवार होकर आना और जाना सकारात्मक बदलाव लाने वाला साबित होता है। यानि साल 2025 में शारदीय नवरात्रि के बाद अच्छे परिवर्तन देश-दुनिया में देखने को मिल सकते हैं।

नवरात्रि कलश स्थापना की पूजा विधि

नवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें। इसके बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल पर लाल रंग के आसन पर पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ मुख करके बैठे। इसके बाद हाथ में कुश लें और हाथ में जल लेकर पूजा स्थल और पूजन सामग्री पर छिड़क दें और ओम अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः। मंत्र का जप करें। अपना माथे पर चंदन से तिलक करते हुए चंदनस्य महतपुण्यं पवित्रं पाप नाशनम। आपदं हरति नित्यं लक्ष्मी तिष्ठति सर्वदा। मंत्र का जप करें। कलश की स्थापना के लिए सप्तमृतिका बालू में मिलाकर अच्छे से फैलाकर गोलाकर बना लें। इसके बाद बीच में कलश को स्थापित करें। कलश को स्थापित करने से पहले उसपर स्वास्तिक का चिन्ह बना लें। कलश को भी उत्तर या पूर्व दिशा की तरफ रखें। ओम भूरसि भूमिरस्यदितिरसि विश्वधाया विश्वस्य भुवनस्य धर्त्रीं। पृथिवीं यच्छ पृथिवीं दृग्वंग ह पृथिवीं मा हि ग्वंग सीः।। मंत्र का जप करते हुए कलश स्थापित करने के लिए मिट्टी को फैलाएं। इसके बाद मिट्टी में जौं को कलश के नीचे रखी मिट्टी में मिला दें और ओम धान्यमसि धिनुहि देवान् प्राणाय त्यो दानाय त्वा व्यानाय त्वा। दीर्घामनु प्रसितिमायुषे धां देवो वः सविता हिरण्यपाणिः प्रति गृभ्णात्वच्छिद्रेण पाणिना चक्षुषे त्वा महीनां पयोऽसि।। मंत्र का जप करें। ओम आ जिघ्र कलशं मह्या त्वा विशन्त्विन्दव:। पुनरूर्जा नि वर्तस्व सा नः सहस्रं धुक्ष्वोरुधारा पयस्वती पुनर्मा विशतादयिः।। मंत्र का जप करते हुए कलश पर फूल रख दें। ओम वरुणस्योत्तम्भनमसि वरुणस्य स्काभसर्जनी स्थो वरुणस्य ऋतसदन्यसि वरुणस्य ऋतसदनमसि वरुणस्य ऋतसदनमा सीद।। मंत्र को बोलते हुए जल को कलश में भर दें। ओम त्वां गन्धर्वा अखनस्त्वामिन्द्रस्त्वां बृहस्पतिः। त्वामोषधे सोमो राजा विद्वान् यक्ष्मादमुच्यत।। मंत्र का जप करे और कलश पर चंदन से तिलक लगा दें। कलश के जल को प्रभावशाली बनाने के लिए उसमें सर्वोषधि डालें और सर्वोषधि डालते हुए ओम या ओषधी: पूर्वाजातादेवेभ्यस्त्रियुगंपुरा। मनै नु बभ्रूणामह ग्वंग शतं धामानि सप्त च।। मंत्र बोलें। कलश पर पंच पल्लव रखते हैं और पल्लव रखते हुए ओम अश्वस्थे वो निषदनं पर्णे वो वसतिष्कृता।। गोभाज इत्किलासथ यत्सनवथ पूरुषम्।। मंत्र का जप करें।कलश में सात प्रकार की मिट्टी डालें और बोले ओम स्योना पृथिवि नो भवानृक्षरा निवेशनी। यच्छा नः शर्म सप्रथाः। कलश में सुपारी डालें और बोलें ओम याः फलिनीर्या अफला अपुष्पायाश्च पुष्पिणीः। बृहस्पतिप्रसूतास्ता नो मुञ्चन्त्व ग्वंग हसः।।इसके बाद कलश में सिक्का डालें और कहें ओम हिरण्यगर्भः समवर्तताग्रे भूतस्य जातः पतिरेक आसीत्। स दाधार पृथिवीं द्यामुतेमां कस्मै देवाय हविषा विधेम।।कलश में वस्त्र अर्पित करें वस्त्र अर्पित करने का मंत्र है वासो अग्ने विश्वरूप ग्वंग सं व्ययस्व विभावसो।। कलश पर पीले और लाल रंग का वस्त्र अर्पित करें। कलश में अक्षत डालें और अक्षत डालते समय वस्नेव विक्रीणावहा इषमूर्ज ग्वंग शतक्रतो।। मंत्र का जप करें।कलश पर नारियल रखने के लिए पहले नारियल पर एक वस्त्र लपेट लें और बोलें ओम याः फलिनीर्या अफला अपुष्पा याश्च पुष्पिणीः। बृहस्पतिप्रसूतास्ता नो मुञ्चन्त्व हसः।। बोलते हुए नारियल को कलश पर स्थापित कर दें।अंत में घी का दीपक जलाकर परिवार के साथ मिलकर मां दुर्गा का पूजन शुरु कर दें।
Show More

Sheemon Nigam

Chief Editor csnn24.com | BJMC +MJMC | Artist by Passion, Journalist by Profession | MD of Devanshe Enterprises, Video Editor of Youtube Channel @buaa_ka_kitchen and Founder of @the.saviour.swarm | Freelance Zoophilist, Naturalist & Social Worker. Podcastor and Blogger | Fresh Experience as Anchor, Content creator and Editor in Media Industry | CACT AWBI & Member of PFA India, Peta India and PAL Foundation Mumbai.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Don`t copy text!