मदरसा-दारुल-मदरसा-दारुल-उलूम-आयशा-सिद्धीका-लिलबना राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग अध्यक्ष ने लिखा मध्य प्रदेश प्रमुख सचिव को पत्र…-
रतलाम में चल रहे अवैध मदरसों के संदर्भ में लिखा पत्र पांच दिवस के अंतर्गत देना होगा जवाब..मध्य प्रदेश बाल संरक्षण आयोग की सदस्यता निवेदिता शर्मा के द्वारा 31 जुलाई को मदरसे का किया गया था निरीक्षण...l रतलाम जिला प्रशासन की ओर से एडीएम शालिनी श्रीवास्तव ने मदरसे को दे दी थी क्लीन चिट...... इसके पश्चात अपने X हैंडल पर राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने जताया था अपना विरोध और लिखा था कि रतलाम की एडीएम मैडम को प्रशिक्षण की आवश्यकता है... इसके पश्चात भी जिला प्रशासन मूक दर्शक बना रह... मध्य प्रदेश बाल संरक्षण आयोग के द्वारा जारी निर्देश पत्र के पश्चात रतलाम कलेक्टर ने मदरसे का जाकर किया निरीक्षण और बच्चों को दिलाया ऐडमिशन..

(www.csnn24.com) रतलाम मैं अवैध रूप से संचालित हो रहे मदरसों का मुद्दा एक बार पुनः सुर्खियों में है। विगत महीने 31 तारीख को मध्य प्रदेश बाल संरक्षण आयोग की सदस्य निवेदिता शर्मा के द्वारा और रतलाम के खाचरोद रोड स्थित मदरसे का निरीक्षण किया गया था तत्पश्चात उनके द्वारा वहां पर गंभीर अनियमितताएं पाई गई थी। इसमें सबसे बड़ा विषय यह निकल कर आया था कि जब बाल संरक्षण आयोग की सदस्य के द्वारा वहां पर निरीक्षण किया गया तो बहुत सारी अनियमितताएं मिली थी। बच्चियों के कमरे में सीसीटीवी कैमरे लगे थे। इसके अलावा एक कमरे में 20 से 25 बच्चियों को फर्श पर रखा गया था। इसके पश्चात निरीक्षण के बाद रतलाम के चार से पांच मदरसों को बंद करने की अनुशंसा की गई थी। जिला प्रशासन के द्वारा उसे हल्के में लिया गया था। और फिर इस विषय पर ओर सबसे बड़ा विषय यह निकाल कर आया था कि रतलाम जिला प्रशासन की तरफ से मदरसे में निरीक्षण करने पहुंची एडीएम महोदय के द्वारा मदरसे को क्लीन चिट दे दी गई थी। इसके पश्चात राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष के द्वारा अपने x हैंडल पर नाराजगी जताते हुए और रतलाम जिले की एडीएम महोदया शालिनी श्रीवास्तव को मदरसों का प्रवक्ता बताया गया था। इस सब घटनाक्रम के पश्चात रतलाम जिले के कलेक्टर राजेश बाथम मदरसा पहुंचे उन्होंने बच्चियों के एडमिशन की व्यवस्था करी। अब राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग के द्वारा मध्य प्रदेश के प्रमुख सचिव को पत्र लिखा गया है और उसमें उल्लेखित किया गया है कि….मदरसा-दारुल-उलूम-आयशा-सिद्धीका-लिलबना
सीपीसीआर अधिनियम, 2005 की धारा 13 (1) (जे) के तहत अपने आदेश के अनुसार, आयोग ने मध्य प्रदेश के एक अवैध मदरसा जिले में चिंताजनक स्थितियों के बारे में समाचार रिपोर्टों पर स्वत: संज्ञान लिया, जहां युवा लड़कियों को रखा जाता है। कथित तौर पर अपमानजनक परिस्थितियों में रखा जा रहा है। दारुल उलूम आयशा सिद्दीका लिलबनात नाम के इस मदरसे पर बच्चों के साथ दुर्व्यवहार करने और उन्हें अपर्याप्त सुविधाएं मुहैया कराने का आरोप लगाया गया है। यह भी आरोप है कि मदरसे की लड़कियां जिन कमरों में रह रही थीं, वहां भी कैमरे लगाए गए थे. कथित तौर पर बच्चों को स्कूल नहीं भेजा जा रहा है।

मदरसे में गंभीर विसंगतियां पाए जाने पर आयोग आपसे अनुरोध करता है कि संबंधित कानूनों के तहत मामले में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इस पत्र के जारी होने के पांच (5) दिनों के भीतर सहायक दस्तावेजों/विवरणों के साथ एक विस्तृत रिपोर्ट आयोग के साथ साझा की जा सकती है।
अब देखना है कि इस आदेश का कितना असर होता है।





