जोशीमठ के साथ उत्तरकाशी और नैनीताल का भविष्य भूस्खलन ही है
अवैज्ञानिक विकास कार्यों पर भड़के एक्सपर्ट

कुमाऊं विश्वविद्यालय के सेंटर ऑफ एडवांस्ड स्टडी इन जियोलॉजी के प्रो. बहादुर सिंह कोटलिया ने कुछ सवाल खड़े किए हैं? क्योंकिक्यों वो जोशीमठ की स्थिति से परेशान हैं| कहते हैं
ऐसी और भी जगहें हैं जो धंस सकती हैं| आधा हिमालय तो हम खा चुके हैं, आधा बचा हुआ यह सड़क चौड़ीकरण खा जाएगा| पहले उनके सवाल जान लेते हैं?
इन सवालों के साथ प्रो. कोटलिया पूछते हैं कि चार धाम यात्रा के लिए जो सड़क चौड़ीकरण हो रहा है, क्या वह वैज्ञानिक तरीके से हो रहा है? क्या उत्तराखंड के विकास को लेकर किसी तरह की साइंटिफिक स्टडी की जाती है. आप सड़कों को चौड़ा करने के लिए किसी चट्टान को काटोगे| वह फिर भरभरा कर गिर पड़ेगी| यह बहुत बड़ा सवाल है कि किसी भी धाम या मंदिर को जाने के लिए लोग हजारों सालों से पैदल ही जाते थे, जिसकी आस्था होती है वह पैदल ही जाता है| तो हर मंदिर तक सड़क ले जाने की जरूरत क्या है?
प्रोफेसर कोटलिया बताते हैं कि ऐसे तो पूरा उत्तराखंड ही संवेदनशील है, पर जब भूस्खलन की बात होती है तो कुछ शहर है जो भूस्खलन की दृष्टि से अति संवेदनशील है जैसे उत्तरकाशी| उत्तरकाशी ग्लेशियल मलबे पर बसा है| साथ ही चंपावत जिले का सुखी ढंग से लेकर टनकपुर तक का क्षेत्र बहुत ही संवेदनशील है क्योंकिक्यों उसमें शिवालिक श्रेणी की चट्टाने हैं| वह भी भरभरा कर गिरती है| जोशीमठ में भू धंसाव की घटना के बाद नैनीताल में भी प्राकृतिक हलचल के खतरे के डर से लोग सहमे हुए हैं | जोशीमठ की तरह नैनीताल भी खतरे में है |
नैनीताल की बलिया नाला पहाड़ी के ट्री टमेंट के लिए इस वर्ष भी शासन ने 192 करोड़ रुपए की घोषणा की है| आपदा सचिव रंजीत सिन्हा ने कहा है कि जल्द ही हाईटेक तरीके से इसका ट्री टमेंट कर समस्या का समाधान होगा| विदेश से कुछ बड़ी कंपनियों को भी बुलाया जा रहा है|





