बैंड बाजे धूमधाम नृत्य के साथ निकली अनोखी शव यात्रा
गौ माता की शव यात्रा में सैकड़ों की संख्या में शामिल हुए ग्रामीण समाधि के बाद अब बनेगा मंदिर

(www.csnn24.com) ईश्वर सिंह राठौड़/रावटी आधुनिकता के दौर में पुराने रीति रिवाज संस्कार धीरे-धीरे धूमिल होते जा रहे हैंl और अपनी जड़ें छोड़ते जा रहे हैंl परंतु अक्सर देखने में आता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी धर्म के प्रति वही श्रद्धा अथवा समर्पण देखने में आता है जो पुराने समय में देखने में आता थाl ऐसा ही कुछ मामला रतलाम जिले के रावटी में देखने में आया है जहां पर एक गौ माता का निधन होने के पश्चात ग्रामीणों के द्वारा बैंड बाजे और नृत्य के साथ उसकी बड़े धूमधाम से शव यात्रा निकाली गई।

तथा गौमाता को समाधि दी गई, वैसे भी हिंदू धर्म में किसी की मृत्यु के पश्चात गौ माता दान करने का प्रचलन है कहा जाता है कि इसके सहारे व्यक्ति वेतने नदी को पार कर कर स्वर्ग पहुंच जाता ह lइसके पश्चात एक शोक सभा और बैठक भी रखी गई जिसमें निर्णय लिया गया कि समाधि स्थल पर गौ माता का मंदिर ग्रामीण लोगों के सहयोग से बनाया जाएगाl

पूरे मामले के अनुसार रावटी निवासी श्रेणिक कुमार चत्तर जिनको ग्रामवासी चक्का सेठ के नाम से जानते हैं काफी धार्मिक प्रवृत्ति के माने जाते हैं। उन्होंने गौ सेवा में अपना जीवन समर्पित कर रखा है। और उनके पास एक गाय थी जिसे उन्होंने बहुत ही लगाव से पाला था तथा पहले से ही मन बना रखा था कि यदि गाय का निधन हो जाता है तो वह धूमधाम से उसकी शवयात्रा को निकालेंगे तत्पश्चात समाधि देकर गांव वालों की सहमति से मंदिर का निर्माण कराएंगे। इसी के चलते आज गाय के निधन के पश्चात उन्होंने उसकी शव यात्रा को बैंड बाजे और धूमधाम के साथ निकाली इस दौरान पूरी यात्रा में किन्नरों ने भी नृत्य करा यात्रा के समाप्त होने के पश्चात गौ माता को समाधि दी गई तत्पश्चात अब वहां पर मंदिर बनाने का निर्णय भी लिया जा रहा है। संपूर्ण विधि विधान और धूमधाम से निकली यह शव यात्रा ग्रामीण अंचल क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। वैसे भी हिंदू धर्म में किसी की मृत्यु के पश्चात गौमाता को दान देने का प्रचलन या कहे की प्रथा । और इसके पीछे मान्यता यह है कि मृत्यु के पश्चात गौ माता के सहारे व्यक्ति वैतरणी नदी को पार कर कर स्वर्ग जाता है। इसी आस्था और भाव के साथ इस शव यात्रा में सैकड़ों की संख्या में में धर्मालु शामिल हुए।





