
विचारणीय
अपराध ये की वो बेजुबान को रोटी देती है। इससे सभ्य लोग जो खुद को धरती का मालिक समझ बैठे है, उन्हे दिक्कत है। हां ,हो सकती है ,स्वाभाविक है ,लेकिन विरोध का तो तरीका इन सभ्य लोगो का सभ्य हो!
एक नाबालिक लड़की के बाल खींच कर घसीटना , उसकी मां के साथ बदसलूकी करना ,ये कौन सी सभ्यता है ? क्या यही इंसानियत और पाश इलाके के तथाकथित बुद्धिजीवियों की पहचान है? विकास यात्रा हो या कोई भी आयोजन कन्याओं के पैर पूजने वाले दल के नेताजी ही कन्याओं के साथ बदसलूकी कर रहे है । कानून को ठेंगा दिखा रहे है और खाकी को अपने इशारों पर नचवा रहे है । महिला के नाम पर दौड़ कर अपराध कायम करने वाले साहब , दो दिन से नेताजी के पीछे दुम हिला रहे है। यह जरुरी नहीं कि भीड़ हमेशा सही रास्ते पर चले। इसलिए सोचिए और समझिए ।महिला और उसकी बेटी के साथ बदसलूकी को गंभीरता से लीजिए, वरना शिवराज और उनके अनुयायियों को कह दीजिए की उनके ही राज्य में उनके अधिकारी ही कन्या पूजन को महज नौटंकी समझते है !
साभार- रतलाम प्रेस क्लब अध्यक्ष मुकेश पुरी गोस्वामी की फेसबुक वाल से।





