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ज्योतिष एवं वास्तुधार्मिक

Shradh Paksh 2025 : चंद्र ग्रहण के साये में शुरू होगा पितृ पक्ष 2025

और सूर्य ग्रहण पर खत्म होगा पितृ पक्ष

Publish Date: September 7, 2025

www.csnn24.com | पितरों के प्रति श्रद्धा का महापर्व महालय \ पितृपक्ष की आज 07 सितंबर 2025 से शुरूआत हो रही है | जिस श्राद्ध को करने से पितरों का आशीर्वाद बरसता है, वह चंद्रग्रहण के दिन से प्रारंभ होकर सूर्य ग्रहण के दिन सर्वपितृ अमावस्या 21 सितंबर 2025 को समाप्त होगा |

पूर्वज किन रूपों में आते हैं?

धार्मिक मान्यता है कि पितृ पक्ष के दौरान हमारे पूर्वज पशु-पक्षियों के रूप में धरती पर आते हैं|  वे हमारे द्वारा किए गए कर्मों और अर्पित आहार को स्वीकार करते हैं और फिर आशीर्वाद देकर जाते हैं | खासतौर पर गाय, कुत्ता, कौवा और चींटी को पूर्वजों का प्रतीक माना जाता है| इन जीवों के लिए भोजन का अंश निकालना ही महाबलि कर्म कहलाता है|   श्राद्ध के समय जब हम भोजन बनाते हैं तो उसमें से कुछ हिस्सा पितरों के लिए अलग रखा जाता है | यही अंश गाय, कुत्ते, चींटी  , कौवे और देवताओं को अर्पित किया जाता है| इन पांचों के लिए भोजन का हिस्सा निकालकर जो अर्पण किया जाता है, उसे पंचबलि कर्म कहा जाता है| यह बलि किसी प्राणी की बलि नहीं है, बल्कि पांच रूपों में आहार अर्पित करने की परंपरा है, जिससे पितरों की तृप्ति मानी जाती है |

पंचबलि में क्यों पांच तत्व होते हैं महत्वपूर्ण?

पंचबलि का आधार पांच तत्वों पर टिका है| कुत्ता जल तत्व का प्रतीक है, चींटी चीं अग्नि तत्व की प्रतीक मानी जाती है, कौवा वायु का प्रतीक है, गाय पृथ्वी की प्रतिनिधि है और देवता आकाश के प्रतीक हैं | इस तरह से भोजन अर्पण कर हम पांचों तत्वों के प्रति आभार व्यक्त करते हैं| शास्त्रों में कहा गया है कि मानव शरीर इन्हीं पंचतत्वों से निर्मित है और मृत्यु के बाद यही शरीर दोबारा इन्हीं तत्वों में विलीन हो जाता है |

पितृ पक्ष 2025 तिथियां और टाइम 

पितृ पक्ष 2025 तारीख श्राद्ध 2025 तिथियां कुतुप मूहूर्त रौहिण मूहूर्त अपराह्न काल
7 सितंबर 2025, रविवार पूर्णिमा श्राद्ध 11:54 AM से 12:44 PM 12:44 PM से 01:34 PM 01:34 PM से 04:05 PM
8 सितंबर 2025, सोमवार प्रतिपदा श्राद्ध 11:53 AM से 12:44 PM 12:44 PM से 01:34 PM 01:34 PM से 04:04 PM
9 सितंबर 2025, मंगलवार द्वितीया श्राद्ध 11:53 AM से 12:43 PM 12:43 PM से 01:33 PM 01:33 PM से 04:03 PM
10 सितंबर 2025, बुधवार तृतीया श्राद्ध 11:53 AM से 12:43 PM 12:43 PM से 01:33 PM 01:33 PM से 04:02 PM
10 सितंबर 2025, बुधवार चतुर्थी श्राद्ध 11:53 AM से 12:43 PM 12:43 PM से 01:33 PM 01:33 PM से 04:02 PM
11 सितंबर 2025, गुरुवार पंचमी श्राद्ध 11:53 AM से 12:42 PM 12:42 PM से 01:32 PM 01:32 PM से 04:02 PM
12 सितंबर 2025, शुक्रवार षष्ठी श्राद्ध 11:53 AM से 12:42 PM 12:42 PM से 01:32 PM 01:32 PM से 04:02 PM
13 सितंबर 2025, शनिवार सप्तमी श्राद्ध 11:52 AM से 12:42 PM 12:42 PM से 01:31 PM 01:31 PM से 04:00 PM
14 सितंबर 2025, रविवार अष्टमी श्राद्ध 11:52 AM से 12:41 PM 12:41 PM से 01:31 PM 01:31 PM से 03:59 PM
15 सितंबर 2025, सोमवार नवमी श्राद्ध 11:51 AM से 12:41 PM 12:41 PM से 01:30 PM 01:30 PM से 03:58 PM
16 सितंबर 2025, मंगलवार दशमी श्राद्ध 11:51 AM से 12:41 PM 12:41 PM से 01:30 PM 01:30 PM से 03:57 PM
17 सितंबर 2025, बुधवार एकादशी श्राद्ध 11:51 AM से 12:41 PM 12:41 PM से 01:30 PM 01:30 PM से 03:56 PM
18 सितंबर 2025, गुरुवार द्वादशी श्राद्ध 11:51 AM से 12:39 PM 12:39 PM से 01:28 PM 01:28 PM से 03:55 PM
19 सितंबर 2025, शुक्रवार त्रयोदशी श्राद्ध 11:51 AM से 12:39 PM 12:39 PM से 01:28 PM 01:28 PM से 03:55 PM
20 सितंबर 2025, शनिवार चतुर्दशी श्राद्ध 11:50 AM से 12:39 PM 12:39 PM से 01:27 PM 01:27 PM से 03:54 PM
21 सितंबर 2025, रविवार सर्वपितृ अमावस्या श्राद्ध 11:51 AM से 12:38 PM 12:38 PM से 01:27 PM 01:27 PM से 03:53 PM

 पितृ पक्ष में घर पर कैसे करें श्राद्ध  

  • श्राद्ध वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें। इसके बाद घर की साफ-सफाई करें और पूरे घर में गंगाजल छिड़कें।
  • इसके बाद दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके बाएं पैर को मोड़कर बाएं घुटने को जमीन पर टिका कर बैठ जाएं।
  • फिर एक तांबे का चौड़ा बर्तन लें जिसमें काले तिल, गाय का कच्चा दूध और गंगाजल पानी डालें।
  • फिर जल को दोनों हाथों में भरकर सीधे हाथ के अंगूठे से उसी बर्तन में गिराएं और इस दौरान अपने पितकों का स्मरण करें।
  • पितरों के लिए भोजन तैयार करें।
  • श्राद्ध के लिए ब्राह्मण को घर पर बुलाएं और सच्चे मन से उन्हें भोजन कराएं और ब्राह्मण के पैर धोएं।
  • श्राद्ध पक्ष में पितरों के निमित्त अग्नि में गाय के दूध से बनी खीर अवश्य अर्पित करें।
  • इस बात का विशेष ध्यान रखें कि ब्राह्मण को भोजन कराने से पहले पंचबली यानी गाय, कुत्ते, कौवे, देवता और चींटी के लिए भोजन अवश्य निकालें। ये एक महत्वपूर्ण परंपरा है।
  • भोजन के बाद ब्राह्मणों को दान भी करें और उनका आशीर्वाद लें।

क्या चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण से प्रभावित होगा श्राद्ध?

भाद्रपद पूर्णिमा के दिन किए जाने वाले श्राद्ध में चंद्र ग्रहण का सूतक आड़े नहीं आ रहा है क्योंकि चंद्र ग्रहण जहा रात्रि में लगेगा वहीं इसका सूतक काल आज मध्यान्ह काल के बाद लग रहा है | ऐसे में आज भाद्रपद पूर्णिमा का श्राद्ध करने में किसी भी प्रकार का कोई दोष या परेशानी नहीं है | धार्मिक मान्यता के अनुसार, चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण लगने से 9 घंटे पहले ही शुरू हो जाता है |  इस आधार पर 7 सितंबर यानी आज दोपहर 12 बजकर 57 बजे से सूतक काल आरंभ होगा | इस अवधि में किसी भी तरह के शुभ कार्य, पूजा-पाठ, खरीदारी या मंदिर दर्शन करना वर्जित माना गया है| इसलिए, ज्योतिषियों की मानें तो आज दोपहर 12 बजकर 59 मिनट से पहले ही श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और पवित्र नदियों में स्नान जैसे धार्मिक कार्य पूरे कर लेने चाहिए |

सूर्य ग्रहण केवल ​दक्षिण गोलार्ध में आस्ट्रेलिया के दक्षिण भाग में अटलांटिक और अंटार्टिका क्षेत्र में सूर्योदय काल में दिखाई देगा | युनिर्वसल समय के अनुसार यह खंड ग्रास सूर्य ग्रहण 17:29 बजे से फिजी द्वीप समूह के उत्तर पूर्वी क्षेत्र से अटलांटिक पूर्वी क्षेत्र के सुदूर क्षेत्र में इसका मोक्ष प्राप्त होगा | रात में लगने के कारण यह सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा, इसका सूतक भी मान्य नहीं होगा। इस वजह से माना जा रहा है कि इसका सर्वपितृ अमावस्या के दिन किए जाने वाले श्राद्ध कर्म पर भी कोई प्रभाव नहीं होगा। सूतक मान्य नहीं होने पितरों की पूजा पूरे दिन की जा सकेगी। पंचांग के अनुसार इस दिन श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान के लिए सुबह 11.50 बजे से दोपहर 1.27 बजे तक उचित मुहूर्त है। इस दौरान बिना किसी शंका के पूर्वजों की पूजा कर सकते हैं और ब्राह्मण भोजन करा सकते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ देव दोपहर के समय के स्वामी माने जाते हैं। इसलिए, पितरों के तर्पण के लिए दोपहर में अपने पितरों का ध्यान करें। इसके अलावा, शाम के समय अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीया जलाएं और पूजा करें। इस दिन नदी में दीपदान भी किया जाता है। माना जाता है कि ऐसा करने से पितरों को अपने लोक में लौटने में आसानी होती है।

 

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Sheemon Nigam

Chief Editor csnn24.com | BJMC +MJMC | Artist by Passion, Journalist by Profession | MD of Devanshe Enterprises, Video Editor of Youtube Channel @buaa_ka_kitchen and Founder of @the.saviour.swarm | Freelance Zoophilist, Naturalist & Social Worker. Podcastor and Blogger | Fresh Experience as Anchor, Content creator and Editor in Media Industry | CACT AWBI & Member of PFA India, Peta India and PAL Foundation Mumbai.

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