
www.csnn24.com| कभी सोशल मीडिया पर रील , कभी पोस्ट तो कभी वीडियो के द्वारा लोगो को जागरूक किया जा रहा है , ट्वीट कर के आवाज़ उठाई जा रही हे तो कभी हैशटैग को वायरल कर के अपनी बात रखी जा रही है ! अलग से इसके लिए बहुत सोशल मीडिया प्लेटफार्म भी बनाया गया है ! आज भारत का बच्चा , बूढ़ा और नौजवान बस अपने इतिहास से चले आ रहे सच्चे मित्र को बचाना चाहता है, वो है आवारा कुत्ता ! हमारे अपने देसी इंडियन स्ट्रीट डॉग्स ! क्योकि सुप्रीम कोर्ट ने 7 नवंबर 2025 को ऐसा एक तरफ़ा फैसला दिया है जिसमे अब कुत्ते के साथ गाय , बेल, बिल्ली, बंदर सब असुरक्षित हो चुके है !
देश भर में लगातर कई प्रकार के प्रोटेस्ट हो रहे है, जगह जगह से सेकड़ो लोग मिलकर आवाज़ उठा रहे है
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण जैसे वैज्ञानिक तरीके अपनाए जाने चाहिए, न कि उन्हें उनके परिचित वातावरण से हटाकर कहीं और छोड़ दिया जाना चाहिए। उनका मानना है कि यह कदम जानवरों के प्रति क्रूरता है और यह समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। यह मामला अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है, और कई लोग सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर सवाल उठा रहे हैं जिसमे धीरे धीरे अब सोशल मीडिया के साथ प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिआ भी शामिल है !
एक प्रदर्शनकारी ने एएनआई से बात करते हुए कहा, “मैं खुद को पशु प्रेमी या कुत्ता प्रेमी नहीं कहता। मैं इस देश का नागरिक हूं, और मैं मानवता के लिए यहां हूं। सुप्रीम कोर्ट के पिछले आदेश में कहा गया था कि पिछले तीन सालों में रेबीज से कोई मौत नहीं हुई है। फर्जी रिपोर्टों के कारण, उन्होंने कुत्तों को स्थानांतरित करने का आदेश जारी किया है, जिससे समस्या बढ़ेगी।” उन्होंने आगे कहा, “लोगों को इनहेलर का सहारा लेने के लिए मजबूर किया जा रहा है क्योंकि वे ठीक से सांस नहीं ले पा रहे हैं। जब उनके पास अपनी अक्षमता का कोई जवाब नहीं है, और प्रदूषण और वोट-चोरी के मुद्दे हैं, तो वे ऐसे मुद्दे उठा रहे हैं जहां जानवर पीड़ित होंगे क्योंकि वे बोल या वोट नहीं दे सकते। मैं मांग करता हूं कि सरकार वैज्ञानिक और तार्किक समाधान अपनाए, और सुप्रीम कोर्ट खुद का मजाक न बनाए। उन्हें कुत्तों को स्थानांतरित करने के बजाय उनका नसबंदी करवाना चाहिए।”

देश की स्ट्रे एनिमल पर पहली प्रेस कांफ्रेंस
देशभर में स्ट्रे एनिमल्स पर हो रहे अत्याचारों में तेजी से बढ़ोतरी को देखते हुए पशु प्रेमियों ने गंभीर चिंता जताई है | सोमवार, 24 नवंबर को देश की स्ट्रे एनिमल पर पहली प्रेस कांफ्रेंस – ग्रेटर नोएडा की स्वर्ण नगरी स्थित प्रेस क्लब में आयोजित की गयी | पशु अधिकार कार्यकर्ता संक्षय बब्बर के प्रतिनिधित्व में पशु कल्याण से जुड़ी संस्थाओं के अन्य प्रतिनिधियों ने कहा कि पिछले कुछ सालों में पशुओं पर एसिड अटैक, रेप, टॉर्चर, हिट-एंड-रन और ज़हर देकर मारने जैसी घटनाओं में भारी वृद्धि हुई है !
सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश को रद्द करने और ठोस कानून लागू करने समेत कई मांगें की गईं हैं, प्रूफ्स के साथ डाटा प्रस्तुत किये गये | पशु अधिकार कार्यकर्ता जसमीत कौर, प्रणव ग्रोवर आदि ने बताया कि गाय, कुत्ते और बिल्लियों जैसे मासूम जानवर भी क्रूरता का शिकार लगातार बन रहे हैं | उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, ”ऐसे मामलों में पुलिस अक्सर एफआईआर दर्ज करने में ढिलाई बरतती है, यहां तक कि यदि मामला दर्ज भी हो जाए, तो आरोपी मात्र 50 रुपये की जमानत पर छूट जाते हैं ! कमजोर कानूनों के कारण यह व्यवस्था और सुप्रीम कोर्ट के फैसले अपराधियों के लिए वरदान साबित हो रही है |”
कार्यकर्ताओं ने कहा कि 11 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद फीडर्स – जानवरों को खाना खिलाने वालों के साथ दुर्व्यवहार और हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं | लाइव वीडियोस भी इंटरनेट पर वायरल हुए | उन्होंने जानकारी देते हुए कहा कि 11 अगस्त के कोर्ट केआदेश का गलत अर्थ निकाला गया और सोशल मीडिया पर डॉग-बाइट और रेबीज़ से जुड़े मामलों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है यहां तक की इसमें मीडिया के कई जाने माने पोर्टल्स भी शामिल है , जिससे लोगों में भ्रम और डर फैल रहा है तथा हेटर्स को हाइप मिलती है|
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वास्तविक केस स्टडी, डॉग-हेट कैंपेन से जुड़े सबूत किए जारी
उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया पर वायरल कई पोस्ट, वीडियो और आंकड़े बाद में गलत साबित हुए हैं | सरकारी डेटा के अनुसार देश में रेबीज और मानव-पशु संघर्ष की स्थिति उतनी गंभीर नहीं है, जितनी उसे सोशल मीडिया पर दिखाया जा रहा है | प्रेस कॉन्फ्रेंस में संस्थाओं ने दिल्ली, लखनऊ, गुजरात, फरीदाबाद और अन्य शहरों के वास्तविक केस स्टडी, मेडिकल रिकॉर्ड, वीडियो प्रमाण और डॉग-हेट कैंपेन से जुड़े सबूत भी जारी किए | उन्होंने रियल फैक्ट्स , लॉ और रूल्स बताये | ये भी बताया की कई आर्गेनाइजेशन , एनजीओ व् पशु प्रेमियों , एक्टिविस्ट , फीडर, रेस्कुएर की सेकड़ो पोस्ट, वीडियो प्रूफ्स है जो ये सिद्ध करते है की इंसान इन बेज़ुबानों पर अत्याचार कर रहा है | यहां तक की भारत में जिस तरह से रेबीज़ के आंकड़े बताये गए उससे भी बड़े आकड़े प्रदूषण , दुर्घटना , घटना के है ! ऐसी कई विषय हे जिससे भारत जूझ रहा है पर मुद्दा बेवजह बेजुबान को बनाया जा रहा है |
4 प्रमुख मांगें
- सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश को रद्द किया जाए |
- देश में पशु क्रूरता के खिलाफ अधिक कठोर कानून बनाए जाएं |
- राष्ट्रीय स्तर पर पशु क्रूरता मामलों का व्यापक ऑडिट किया जाए |
- नीति निर्माण में अंतरराष्ट्रीय पशु वेलफेयर संस्थाओं और एक्सपर्ट को शामिल किया जाए |
इस संदर्भ में संस्था ने पांच प्रमुख समाधान प्रस्तुत किए हैं जिनमें रिफ्लेक्टिव कॉलर ड्राइव, वैज्ञानिक रूप से लागू ABC (एनिमल बर्थ कंट्रोल) प्रोग्राम, बड़े पैमाने पर एंटी-रेबीज़ टीकाकरण, शेल्टर-आधारित एडॉप्शन और करुणा-आधारित शिक्षा सुधार शामिल हैं। पशु प्रेमियों ने सरकार से अपील की है कि जानवरों पर बढ़ रही हिंसा को गंभीरता से लेते हुए तुरंत प्रभावी कदम उठाए जाएं, ताकि समाज में सुरक्षा, संवेदना और जागरूकता का वातावरण बनाया जा सके न की वो दो ग्रुप्स में बट जाये जो वर्तमान में हे – एनिमल लवर एंड एनिमल हेटर्स !
प्रेस कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य
इस विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य देशभर में तेजी से बढ़ रही स्ट्रे एनिमल क्रूरता, गलत एवं भ्रामक डॉग बाइट–रेबीज़ डेटा, और सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेशों से उत्पन्न गंभीर जटिलताओं को समग्र रूप से देश की जनता व् मीडिया के समक्ष प्रस्तुत करना था ।संस्था का कहना है कि गलत नीतियों, गलत जानकारी और बढ़ती हिंसा के इस दौर में समाज को करुणा, विज्ञान और संवेदनशीलता की ओर लौटना होगा—और यह प्रेस कॉन्फ्रेंस उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
संस्था ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पारित करते समय पशु कल्याण समूहों, विशेषज्ञ संस्थाओं और संबंधित हितधारकों को पर्याप्त रूप से नहीं सुना गया। इसके परिणामस्वरूप कई राज्यों और नगर निकायों ने आदेशों की गलत व्याख्या कर अवैध कुत्ता उठाव और स्ट्रे एनिमल्स पर अत्याचार की घटनाओं को और बढ़ावा दिया है, विशेषकर तब जब देशभर में पर्याप्त शेल्टर, इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रशिक्षित स्टाफ की भारी कमी है। सभी कुत्तों को हटाने या उन्हें शेल्टर में रखने जैसे सुझाव व्यावहारिक रूप से असंभव हैं और इससे शहरों में अव्यवस्था, भय और व्यापक भ्रम फैल रहा है।

पशु कल्याण से जुड़े कई संस्थानों ने कोर्ट दिए गए फैसले की आलोचना की
पशु अधिकार संगठन पेटा इंडिया ने अपने एक प्रेस रिलीज़ में कहा कि कोर्ट का फैसला “ज़मीनी वास्तविकता से जुड़ा नहीं है” | पेटा ने कहा कि देश भर में पाँच करोड़ से ज़्यादा आवारा कुत्ते हैं और 50 लाख से ज़्यादा मवेशी हैं | उसका कहना था कि इन्हें रखने के लिए पर्याप्त शेल्टर होम अभी नहीं हैं |
बीजेपी की पूर्व सांसद मेनका गांधी ने समाचार एजेंसी एनआई को कहा कि कोर्ट का नया फैसला पिछले फैसले वाली दिक्कतों का सामना करेगा, जिसे कोर्ट को बाद में बदलना पड़ा था | उन्होंने कहा कि वे इस फैसले को आगे कोर्ट में चुनौती देंगी | उन्होंने कहा कि अगर कुत्तों को रेलवे स्टेशन, स्कूलों और कॉलेजों से हटाया जा सकता था, तो ये हो जाता | वे बोलीं, “अगर इन्हें हटाया गया, तो ये जानवर जाएँगे कहाँ ?”

इन आंदोलन में लगातर संक्षय बब्बर , विजय रंगारे , मानवी राइ, जागृती मिश्रा, मनिषा यादव, प्रणव बॉक्सर ग्रोवर , सोनिया चौधरी, जसप्रीत कौर, जया भट्टाचार्या जैसे जाने माने एनिमल रेस्कुएर, फीडर, इनफ्लुंसर और एक्टिविस्ट भी शामिल है , लोगो को लगातार जागरूक कर रहे है | इनके साथ मिलकर कई छोटी बड़ी संस्था , एनजीओ और रीजनल ग्रुप्स भी शामिल है | पीपल फॉर एनिमल्स, पीपल फार्म, पाल फाउंडेशन मुंबई , पॉसम फाउंडेशन , हाई पॉस इंडिया , एंटी क्रुएल्टी सेल , अर्थिंग ट्रस्ट, स्ट्रीट डॉग्स ऑफ़ बॉम्बे जैसे अनगिनत ग्रुप्स और अनियमल वेलफेयर इंडिविजुअल जुड़ कर एक दूसरे को सपोर्ट कर रहे है | कई प्रोटेस्टर्स को तो बल पूर्वक पुलिस द्वारा रोका भी गया , अरेस्ट भी किया गया , मारा भी गया ! इस मामले पर भी इंटरनेट पर कई वीडियो वायरल हुए जिसमे पुलिस और सरकार की भी आलोचना हुई है |
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देशभर में हजारों स्टूडेंट में आक्रोश, IIT- मेडिकल, DU समेत कई कॉलेजों में लगातर प्रदर्शन
देशभर में शैक्षणिक संस्थानों के स्टूडेंट बेजुआन जानवरों के लिए आवाज बन रहे हैं। जिस तरह से कुत्तों को हटाया जा रहा है, स्टूडेंट में आक्रोश है और इस अमानवीय क्रूरता के खिलाफ कई शहरों से पिटीशन दाखिल किए जा रहे हैं।जिसमें आईआईटी मुंबई और दिल्ली यूनिवर्सिटी भी शामिल है। इसके अलावा जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी में तो छात्रों ने प्रदर्शन ही कर दिया। छात्रों के गुस्से को देखते हुए प्रबंधन ने कुत्तों को कैंपस से बाहर करने का इरादा छोड़ दिया है। देशभर में 200 से ज्यादा शैक्षणिक संस्थान इस तरह के पत्र जारी कर चुके हैं कि वह अपने कैंपस से कुत्तों को नहीं हटाना चाहते हैं।

1 लाख से ज्यादा लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में लगाई लेटर पिटीशन
देश के अलग-अलग हिस्सों से लोगों ने लेटर पिटीशन फाइल कर सुप्रीम कोर्ट से आवारा कुत्तों के खिलाफ फैसले को बदलने की अपील की है। कोर्ट ने सभी इंस्टीट्यूशनल एरिया से आवारा कुत्तों को हटाने की अपील की है।शनिवार 29 नवंबर को सुबह 9 बजे से लोगों ने पोस्ट ऑफिस में लेटर पोस्ट करना शुरू कर दिया था। दिन खत्म होने तक यह संख्या एक लाख के पार पहुंच गई। animalwrites.in नाम की वेबसाइट के जरिए इस पहल को मैनेज किया जा रहा है। 50 हजार से ज्यादा लोगों ने सुप्रीम कोर्ट को लेटर लिखने के बाद, रसीद भी इस वेबसाइट पर अपलोड कर रहे है ।
क्या है लेटर पिटीशन ?
किसी पब्लिक इंपॉर्टेंस के मुद्दे को माननीय सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचाने के कई तरीके बताए गए हैं, उनमें से एक लेटर पिटीशन भी है। देश भर के आम नागरिक माननीय कोर्ट के साथ सम्मानजनक और संवैधानिक जुड़ाव के अपने संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं और कम्युनिटी एनिमल्स मामले में कोर्ट के आदेश पर अपनी आपत्ति जाहिर कर रहे हैं। कोर्ट ने सात नवंबर को जारी आदेश में सभी सरकारी संस्थानों के परिसर से आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देश दिए थे। लेटर पिटीशन के जरिए लोग कुत्तों को इंस्टीट्यूशनल एरिया से हटाने के ऑर्डर पर रोक लगाने, उसे वापस लेने और उस पर फिर से विचार करने की अपील कर रहे हैं।

देश कई जिलों से हजारों लोग इसमें शामिल हुए
दिल्ली मुंबई में कई जाने-माने एनिमल एक्टिविस्ट, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर,सेलेब्रिटी भी सुप्रीम कोर्ट को लेटर पिटीशन लिखने के लिए लाइन में शामिल हुए। इस मौके पर अंबिका शुक्ला ने कहा, “इस देश के इतिहास में कभी भी इतने सारे लोग एक ही दिन में चीफ जस्टिस को लेटर पिटीशन के जरिए चिट्ठी भेजने के लिए एक साथ नहीं आए। यह ऑर्डर अनसाइंटिफिक, इंप्रैक्टिकल और पार्लियामेंट द्वारा पास किए गए कानून के खिलाफ है। यह पूरे देश में जानवरों के लिए मौत की सजा जैसा है। इम्फाल , चेन्नई, जोधपुर, वडोदरा, बैंगलोर, कन्याकुमारी , असम ,भोपाल, इंदौर, बेंगलुरु , हैदराबाद ,लखनऊ, जयपुर , पश्चिम में दीव से लेकर उत्तर में कांगड़ा और कुपावाड़ा कश्मीर तक, देश भर के दूर-दराज के इलाकों में, उत्तर-पूर्वी राज्यों की लगभग सभी राजधानियों और बंगाल, केरल और तमिलनाडु की कई जगहों पर भारी संख्या में लोग आए। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गोवा, बिहार , हिमाचल और मध्य प्रदेश में भी काफी भीड़ रही।
क्यों खास है यह इवेंट?
यह इवेंट इस मायने में भी खास था कि यह बिना बैनर वाला इवेंट था। इसका मतलब है कि किसी एक संस्था या व्यक्ति ने इस पर मालिकाना हक नहीं जताया, बल्कि यह पूरे भारत के अलग-अलग लोगों द्वारा चलाया गया एक जन आंदोलन था।
साइलेंट मार्च, कैंडल मार्च, ब्लैक मास्क मार्च, सोशल मीडिया डीपी प्रोटेस्ट, होर्डिंग प्रोटेस्ट, नारे, गाने यहां तक की हनुमान चालीसा के द्वारा भी ये लोग अपनी एकता विश्व भर को बता रहे है ! बेज़ुबानों के लिए यज्ञ और पूजन हवन भी मंदिरो में करवा रहे है | सिर्फ इंडियंस ही नहीं विदेशो से भी सपोर्ट आ रहा है | अब देखना ये है की सुप्रीम कोर्ट तक ये सैकड़ो आवाजें पहुँच पायेंगी या इग्नोर कर दी जायेंगी ! क्या हमारे अपने जानवर अपने ही देश में आज़ादी से रह पायेंगे या चार दीवारी में भ्रस्टाचार, लापरवाही से इंटेंशनली मौत के घाट उतार दिये जायेंगे !?





