
www.csnn24.com| दिवाली हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है जो साल में एक बार पवित्र मास कार्तिक महीने में अमावस्या तिथि को किया जाता है। इस दिन देवी लक्ष्मी के साथ कुबेर और गणेश भगवान का पूजन किया जाता है। यह धनतेरस से शुरू होने वाले पंचदिवसीय पर्व का प्रमुख त्योहार है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान राम 14 वर्ष का वनवास पूरा करके जब अयोध्या लौटे थे तब उनके आगमन की खुशी में दीपावली का त्योहार मनाया गया था। वैसे दिवाली की कई अन्य कथाएं और मान्यताएं हैं। लेकिन सभी कथाओं और मान्यताओं में दिवाली को देवी लक्ष्मी की कृपा पाने का दिन बताया गया है।
दिवाली कब है?
पंचांग की गणना के अनुसार अबकी बार कार्तिक अमावस्या 20 अक्टूबर 2025 को है। लक्ष्मी पूजा मुहूर्त 20 अक्टूबर 2025 को दोपहर 03 बजकर 44 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन 21 अक्टूबर को शाम 05 बजकर 54 मिनट पर समाप्त होगी | दिवाली पर गृहस्थ लोग प्रदोष काल में स्थिर लग्न के समय भगवान गणेश, देवी लक्ष्मी और कुबेर महाराज की पूजा करते हैं। व्यापारी लोग इस दिन अपना खाता बही बदलते हैं। इसलिए व्यापारियों का नया वर्ष भी इसी दिन से शुरू होता है। गुजरात में दिवाली से ही महालक्ष्मी वर्ष का आरंभ माना जाता है।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार यह त्योहार 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस दिन शुभ गणेश के लिए लक्ष्मी पूजा शाम 6:56 बजे से रात 8:04 बजे तक रहेगी। इस समय प्रदोष काल और निशीथ काल का योग बन रहा है, जो लक्ष्मी पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इसलिए लोगों को इस दिन दीपावली मनाना और लक्ष्मी पूजन करना चाहिए |
दिवाली उत्सव
दिवाली के दिन देवी लक्ष्मी कीदिवाली के दिन महालक्ष्मी अपने वाहन उल्लू पर सवार होकर पृथ्वी भ्रमण के लिए आती हैं। इसलिए लोग अपने घर और छत की सफाई करते है। घर में रंगोली बनाकर देवी लक्ष्मी का स्वागत करते हैं। पूजा करने के बाद लोग अपने रिश्तेदारों पड़ोसियों के बीच उपहार और मिठाई बांटते हैं। बच्चों को यह त्योहार इसलिए भी खूब पसंद आता है क्योंकि इसमें उन्हें आतिशबाजी करने का मौका मिलता है। लोग बड़े उत्साह और आनंद के साथ दिवाली का महापर्व मनाते हैं।
दिवाली उत्सव के 5 दिन 2025
1. धनतेरस (धनत्रयोदशी)- शनिवार, 18 अक्टूबर 2025
- भगवान धन्वंतरि और देवी लक्ष्मी की पूजा करें
- सोना, चांदी, पीतल या बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है
- समृद्धि के स्वागत के लिए घरों को साफ और रोशन किया जाता है
2. नरक चतुर्दशी/काली चौदस – रविवार, 19 अक्टूबर 2025
- इसे छोटी दिवाली के नाम से भी जाना जाता है
- सूर्योदय से पहले अभ्यंग स्नान (पवित्र तेल स्नान) किया जाता है ।
- दक्षिण भारत में यह मुख्य दीपावली दिवस है , जो भगवान कृष्ण की नरकासुर पर विजय का प्रतीक है।
3. लक्ष्मी पूजा (मुख्य दिवाली की रात) – सोमवार, 20 अक्टूबर 2025
- देवी लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर की पूजा की जाती है
- दीये अंधकार को दूर भगाने और दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए जलाए जाते हैं
- परिवारों द्वारा घरों और व्यवसायों में लक्ष्मी-गणेश पूजा की जाती है
4. गोवर्धन पूजा/अन्नकूट- बुधवार, 22 अक्टूबर 2025
- भक्तों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत उठाने वाले भगवान कृष्ण की पूजा
- मंदिरों में भव्य भोजन प्रसाद (अन्नकूट) और गोवर्धन अनुष्ठानों के साथ मनाया जाता है
5. भाई दूज/यम द्वितीया- , गुरुवार ,23 अक्टूबर 2025
- भाई-बहन के बीच के बंधन का उत्सव
- बहनों ने भाइयों के माथे पर तिलक लगाया और उनकी दीर्घायु की कामना की
- खुशी के माहौल में उपहारों और मिठाइयों का आदान-प्रदान होता है




