
(www.csnn24.com) रतलाम के पुरातत्व कालीन काशी विश्वनाथ मंदिर में महाशिवरात्रि के अवसर पर सुबह से ही भक्तों का तांता लगा हुआ है lतथा बाबा के दर्शन करने के लिए लोग लंबी लंबी कतारों में खड़े दिखाई दिए।
काशी विश्वनाथ के पंडित ललित शर्मा ने बताया कि या मंदिर पुरातत्व कालीनों होकर अति सिद्ध मंदिर है इसके बारे में स्पष्ट रूप से तो बताया नहीं जाता कितना प्राचीन परंतु उनके पूर्वजों के समय से यहां पर वह पूजा चली आ रही है lऔर यह 500 से अधिक वर्ष पुराना बताया जाता है lकुछ लोग बताते हैं कि यह मंदिर उड़कर यहां पर आया थाl तो कुछ लोग ऐसा भी बताते हैं कि

रतलाम की चारों दिशाओं में इस प्रकार का इसी शैली का मंदिर बने हुए हैं जो नगर की रक्षा करते हैंl यहां पर भक्तों की विशेष आस्था है और ऐसा कोई काम या मनोकामना नहीं जो काशी विश्वनाथ के सामने मांगने पर पूर्ण नहीं होती होl मंदिर के ठीक सामने सामने एक अति प्राचीन जलाशय भी है जिसे रतलाम की शान माना जाता है इस जलाशय की सबसे खास बात यह है कि इसमें 12 महीने पानी भरा रहता है और यह

जलाशय रतलाम का सबसे खूबसूरत एवं साफ सुथरा जलाशय भी माना जाता हैl काशी विश्वनाथ मंदिर की बनावट पुरातत्व कालीन होकर बहुत ही आकर्षक हैl इसकी की छवि देखते ही बनती है गर्भ ग्रह में काशी विश्वनाथ का शिवलिंग विराजित हे तथा माता पार्वती की प्रतिमा भी गर्भ ग्रह में विराजित है कहा जाता है कि यहां पर पूजा अर्चना करने जलाभिषेक करने सभी मनोकामनाएं अवश्य पूरी होती है एवं बाबा सभी कष्टों और रोगों को हरते हैं lयही कारण है कि पूरे साल यहां भक्तों का आना जाना लगा रहता है शिवरात्रि के दिन यहां विशेष पूजा अर्चना की जाती है एवं आकर्षक विद्युत सज्जा भी की जाती है इसके अलावा श्रद्धालुओं द्वारा यहां पर प्रसादी के रूप में फरियाली स्टॉल भी लगाए जाते हैं साथ में भांग की प्रसादी का भी वितरण होता है काशी विश्वनाथ के साथ-साथ मंदिर प्रांगण में एक सिद्ध हनुमान जी का मंदिर नागचंद्रेश्वर मंदिर एवं माता सरस्वती तथा श्री राधा कृष्ण का मंदिर भी स्थापित हैl महाशिवरात्रि के अवसर पर शाम को बाबा विश्वनाथ का विशेष श्रृंगार किया गया एवं इसके पश्चात महा आरती एवं प्रसादी का वितरण हुआ।





