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नहीं भुला पा रहा कालू निशा अमन और खुशी को स्ट्रीट डॉग की वफादारी और प्रेम की अनोखी कहानी
तिहरे हत्याकांड और उससे जुड़ी कुत्ते की अनोखी वफादारी

Publish Date: February 2, 2023
(www.csnn24.com)रतलाम यदि वफादारी की मिसाल देने की बात की जाए तो सबसे ज्यादा मिसाल वफादारी की कुत्तों को लेकर दी जाती है। और इस जानवर की वफादारी की कई मिसाले ढूंढने पर सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से मिल जाती है। यही कारण है कि फिल्मों में भी सर्वाधिक प्रयोग कुत्तों का होता है और उनकी वफादारी दिखाई जाती है इस

वफादारी की मिसाल में किसी फिल्म की बात की जाए तो तेरी मेहरबानियां सबसे पहले ध्यान में आती है और उसके बाद एक कहानी सामने आती है चिल्लर पार्टी की इस फिल्म में भी स्ट्रीट डॉग को लेकर बहुत ही भावनात्मक रूप से बच्चों को उस स्ट्रीट डॉग के प्रति लगाव दिखाया गया है। तो वही फिल्म तेरी

मेहरबानियां में एक कुत्ता अपने मालिक की हत्या का बदला लेता है कुछ ऐसा ही नजारा रतलाम में भी देखने में आ रहा है। जहां पर कालू चर्चा का विषय तो बना ही है साथ ही साथ वफादारी की मिसाल भी दे रहा है । हम बात कर रहे हैं 7 दिन पूर्व रतलाम में हुए जघन्य तिहरे हत्याकांड की जिसमें विंध्यवासिनी कॉलोनी में सोनू तलवाड़ नामक व्यक्ति ने 2 माह पूर्व अपनी पत्नी निशा बोरासी 7 वर्षीय पुत्र अमन एवं 4 वर्ष की बेटी सोनू की कुल्हाड़ी से हत्या कर कर उन्हें घर के बाहर आंगन में गाड़ दिया था और वहां पर प्लास्टर करवा दिया था। और आराम से इस घर में रहकर खा पी रहा था। इस कहानी के पीछे का दूसरा पहलू बहुत ही मार्मिक निकल कर सामने आया है हत्या के पश्चात ही जहां पर इन तीनों को दफनाया गया था वहां पर एक कुत्ता जिसे कॉलोनी वासी कालू के नाम से जानते थे वहां दिन भर रोता रहता था। तत्पश्चात पोल खुल जाने के डर से सोनू तलवाड़ ने इसे यहां से दूर जंगल में ले जाकर छोड़ दिया था। उसके पश्चात यह कालू अपने प्रिय मृतकों को घर ढूंढते हुए वापस आ गया। और अभी भी कालू उस घर के लगभग 5 फिट के करीब गेट को लांग कर उस घर के अंदर चला जाता है। और दिन भर खोदे गए गड्ढे के पास बैठकर रोता रहता है कॉलोनी वासी उसको जैसे तैसे उस गेट के बाहर निकाल भी देते हैं तो वह उन्हें अंदर चला जाता है। और वहां पर रोता रहता है जो भी कुछ कॉलोनी वासियों से खाने के लिए दे देते हैं वह खा लेता है अन्यथा भूखा प्यासा अपनी मालकिन और दोनों बच्चों को ढूंढता रहता है। इधर उधर अपनी सुनी कतार निगाह से देखता रहता है ।और जब भी कोई कार उस मकान के पास आकर रूकती है वह दौड़कर कार के चारों तरफ घूमता है कभी खिड़की में अंदर आ जाता है तो कभी बोनट पर खड़ा होकर देखता है कि क्या उसकी मालकिन और बच्चे वापस आ गए क्योंकि कॉलोनी वासी बताते हैं की हत्यारे सोनू के पास भी एक कार थी और अक्सर वह उसमें आया जाया करते थे। वैसे तो सोनू के पास चार से पांच बहुत महंगे

विदेशी नस्ल के कुत्ते थे जिन्हें उसने हत्याकांड के पश्चात या तो बेच दिया था या अपने परिचितों को दे दिया था। परंतु कालू वहीं पर रह रहा था। और जब वहां पर रोने लगा विलाप करने लगा तो सोनू ने उसे भी जंगल में छोड़ दिया था।परंतु कालु अपनी मालकिन और बच्चों के प्यार को भुला नहीं पाया और पुनः उसी स्थान पर आ गया और अभी भी उनकी तलाश में भटकता रहता है। बताया जाता है कि कालू का जन्म उसी घर के आसपास हुआ था और उसके पश्चात निशा ने उसको पाल लिया था । निशा और उसके बच्चों कालू से इतना प्रेम करने लगे थे कि वह जहां कहीं भी जाते कालू अक्सर उनके पीछे घूमता रहता ।था कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि एक बार फिर से सिद्ध हो गया कि वफादारी में कुत्तों की मिसाल यूं ही नहीं दी जाती वह होते ही वफादार हैं।





