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रतलाम में मां कालिका के दरबार में भक्ति के रंग, दो क्विंटल गुलाल से सराबोर हुआ मंदिर परिसर…

अष्टमी पर भोर में हजारों माताओं-बहनों ने किया गरबा रास, मां काली और भारत माता के स्वरूप में पहुंचीं युवतियां; तलवारों और शस्त्रों का प्रदर्शन भी बना आकर्षण...

Publish Date: October 19, 2026

(www.csnn24.com) रतलाम। शारदीय नवरात्रि की अष्टमी पर सोमवार तड़के शहर के प्रसिद्ध मां कालिका माता मंदिर में आस्था, भक्ति और उत्साह का अनूठा नजारा देखने को मिला। सुबह चार बजे से ही मंदिर परिसर में गरबा रास का उल्लास छाने लगा। मां अंबे के भजनों की गूंज, श्रद्धालुओं के जयकारे और हवा में उड़ते रंग-गुलाल के बीच हजारों माताओं और बहनों ने गरबा कर मां की आराधना की। रंगों से सराबोर मंदिर परिसर को देखकर ऐसा लग रहा था, मानो नवरात्रि के बीच होली का उत्सव उतर आया हो। इस दौरान करीब दो क्विंटल रंग-गुलाल उड़ाया गया।

 

यह आयोजन केवल गरबा और रंगों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें श्रद्धा, शक्ति, संस्कृति और देशभक्ति के रंग भी दिखाई दिए। पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं और युवतियों ने गरबा भजनों की लय पर कदम मिलाए। मां कालिका के दरबार में उमड़ा उत्साह सुबह के साथ बढ़ता गया और मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा।

भोर होते ही मंदिर में जुटने लगीं माताएं-बहनें

नवरात्रि के दौरान मां कालिका माता मंदिर में होने वाले सुबह के गरबा रास का श्रद्धालुओं को हर साल इंतजार रहता है। सोमवार तड़के भी बड़ी संख्या में महिलाएं और युवतियां गरबा खेलने पहुंचीं। भोर की बेला में मां अंबे के भजनों के बीच शुरू हुआ गरबा धीरे-धीरे उत्सव का रूप लेता गया। एक ओर गरबा करने वाली महिलाओं की टोलियां थीं, तो दूसरी ओर श्रद्धालु इस अनूठे आयोजन को देखने और मां के दर्शन करने के लिए पहुंच रहे थे।

गरबा रास में शामिल महिलाओं के चेहरों पर उत्साह और भक्ति का भाव नजर आया। रंग-गुलाल उड़ने के साथ पूरा परिसर रंगीन हो गया। मां के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का यह पारंपरिक तरीका रतलाम की धार्मिक संस्कृति का खास हिस्सा बन चुका है।

दो क्विंटल गुलाल से सजा भक्ति का उत्सव

इस आयोजन की सबसे खास बात रंग-गुलाल की परंपरा रही। मां कालिका के दरबार में गरबा रास के दौरान करीब दो क्विंटल रंग-गुलाल उड़ाया गया। गुलाल के रंगों के बीच गरबा करती महिलाओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। ढोल और भक्ति गीतों की धुन पर थिरकते कदमों के बीच मंदिर परिसर में उत्सव जैसा माहौल बना रहा।

कालिका माता मंदिर ट्रस्ट के प्रवक्ता राकेश पोरवाल ने बताया कि हर साल की तरह इस बार भी परंपरा के अनुसार दो क्विंटल रंग-गुलाल के बीच माताओं और बहनों ने गरबा रास किया। वर्षों से चली आ रही इस परंपरा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं।

कोई मां काली तो कोई भारत माता बनकर पहुंची

गरबा रास में इस बार धार्मिक स्वरूपों के साथ देशभक्ति की झलक भी दिखाई दी। कोई युवती मां काली का रूप धारण कर पहुंची तो किसी ने भारत माता का स्वरूप अपनाया। अलग-अलग रूपों में सजी युवतियां आयोजन का विशेष आकर्षण रहीं। उनके परिधानों और प्रस्तुति ने गरबा रास को अलग पहचान दी।

मां के विभिन्न स्वरूपों को धारण कर पहुंचीं युवतियों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से शक्ति और भक्ति का संदेश दिया। मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं के बीच यह दृश्य विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा।

भगवा ध्वज और तिरंगे के साथ गरबा

गरबा रास के दौरान कई युवतियां हाथों में भगवा ध्वज और राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा लेकर भी शामिल हुईं। मां अंबे की आराधना के साथ देशभक्ति का यह संगम आयोजन को खास बना रहा था। भक्ति गीतों की धुन पर ध्वज लहराती युवतियों ने गरबा किया। इससे पूरे आयोजन में धार्मिक आस्था के साथ राष्ट्रप्रेम की भावना भी नजर आई।

तलवारों और शस्त्रों का प्रदर्शन बना आकर्षण

गरबा रास के दौरान युवतियों ने तलवारों और अन्य शस्त्रों का प्रदर्शन भी किया। इन प्रस्तुतियों के जरिए शक्ति आराधना की परंपरा को सामने रखा गया। नवरात्रि में मां दुर्गा के शक्ति स्वरूप की पूजा की जाती है। ऐसे में शस्त्र प्रदर्शन ने आयोजन में एक अलग रंग जोड़ा। पारंपरिक गरबा, धार्मिक स्वरूप और शक्ति प्रदर्शन ने मिलकर कार्यक्रम को यादगार बना दिया।

सुबह और रात दोनों समय होता है गरबा

रतलाम के कालिका माता मंदिर में नवरात्रि के दौरान गरबा रास की परंपरा वर्षों पुरानी है। यहां सुबह चार से छह बजे और रात आठ से ग्यारह बजे तक गरबा आयोजित किया जाता है। सुबह के गरबा रास में भाग लेने के लिए श्रद्धालु तड़के ही मंदिर पहुंचने लगते हैं। वहीं, रात के आयोजन में भी बड़ी संख्या में महिलाएं और युवतियां मां की आराधना के लिए जुटती हैं।

नवरात्रि के नौ दिनों में मंदिर में मां कालिका का प्रतिदिन आकर्षक श्रृंगार किया जाता है। मां के दर्शन और गरबा रास में शामिल होने के लिए शहर के अलग-अलग क्षेत्रों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस तरह मंदिर नवरात्रि के दौरान धार्मिक आस्था और सामूहिक उत्सव का प्रमुख केंद्र बना रहता है।

दर्शन के लिए सुबह से लगी रही भीड़

गरबा रास के साथ मां कालिका के दर्शन के लिए भी सुबह से श्रद्धालुओं का पहुंचना जारी रहा। भक्तों ने मां के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। अष्टमी के अवसर पर विशेष पूजा और हवन को लेकर भी श्रद्धालुओं में उत्साह रहा। मंदिर परिसर में सुबह से ही धार्मिक गतिविधियों का माहौल बना रहा।

 

अष्टमी का हवन, नवमी पर कन्या पूजन और भंडारा

इस बार अष्टमी का पर्व दो दिन मनाया जा रहा है। रविवार को भी कई श्रद्धालुओं ने अपने घरों में अष्टमी का पूजन किया, जबकि मां कालिका माता मंदिर में सोमवार को अष्टमी पर्व मनाया जा रहा है।

मंदिर में सोमवार सुबह 10 बजे से अष्टमी का हवन आयोजित किया जाएगा। इसके बाद दोपहर 12 बजे से नवमी के अवसर पर कन्या पूजन होगा। नौ दिनों तक गरबा रास करने वाली सभी माताओं और बहनों के लिए भंडारे का आयोजन भी किया जाएगा। इन धार्मिक कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है।

आस्था और परंपरा का संगम बना आयोजन

मां कालिका माता मंदिर में रंग-गुलाल के बीच हुआ गरबा रास रतलाम की धार्मिक परंपरा की खास पहचान है। यहां श्रद्धालु केवल गरबा खेलने नहीं आते, बल्कि मां की आराधना और सामूहिक भक्ति के इस आयोजन से जुड़ने पहुंचते हैं। भोर में गूंजते भजन, रंगों से सजा मंदिर परिसर और शक्ति स्वरूप में नजर आती युवतियां नवरात्रि की जीवंत तस्वीर पेश करती हैं। मां कालिका के दरबार में सजा यह भक्तिमय माहौल एक बार फिर शहरवासियों के लिए आस्था, उल्लास और परंपरा का यादगार अनुभव बना।

 

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Sheemon Nigam

Chief Editor csnn24.com | BJMC +MJMC | Artist by Passion, Journalist by Profession | MD of Devanshe Enterprises, Video Editor of Youtube Channel @buaa_ka_kitchen and Founder of @the.saviour.swarm | Freelance Zoophilist, Naturalist & Social Worker. Podcastor and Blogger | Fresh Experience as Anchor, Content creator and Editor in Media Industry | CACT AWBI & Member of PFA India, Peta India and PAL Foundation Mumbai.

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