और मेडिकल कॉलेज से मृतक की आत्मा को ले गए……
ढोल ढमाके को तलवार के साथ नृत्य परंपरा...

(CSNN24.NEWS) रतलाम रतलाम के मेडिकल कॉलेज में आत्मा को न्योता देकर वापस ले जाने का अनोखा और सनसनीखेज मामला सामने आया है।
रतलाम के मेडिकल कॉलेज में कल एक अनोखा और सनसनीखेज मामला सामने आया। वहां पर कुछ आदिवासी पूजा सामग्री तथा अन्य सामान लेकर पहुंचे तथा ढोल एवं थाली की थाप पर नृत्य करते रहे। इस समय कुछ पुरुषों के हाथ में खुली तलवारे भी देखी गई तथा वह उसे लहराते हुए नृत्य कर रहे थे यह नजारा देखकर मेडिकल कॉलेज में आए लोगों की उनके आसपास भीड़ लग गई तथा वह इस नजारे को कोतुहल से देखते रहे। इस दौरान एसडीएम की गाड़ी ने भी वहां पर प्रवेश किया था इसमें एसडीएम उपस्थित थे अथवा नहीं कह नहीं सकते।
पूरे मामले के अनुसार लगभग दो माहपूर्व बाजना तहसील के ग्राम छावनी झोडिया नामक गांव में एक युवक कमलेश की कीटनाशक पीने से मौत हो गई थी बताया जा रहा है उसकी मृत्यु मेडिकल कॉलेज में हुई थी। इसके पश्चात उसका दाह संस्कार भी हो गया था। परंतु परिवार में मृतक की बहन का का कहना था कि वह युवक उसके सपने में आकर बार-बार कह रहा है उसकी आत्मा वह मेडिकल कॉलेज में है तथा उसको वहां से आकर ले जाए। । इसके चलते मृतक के परिवार के लोग एवं समाज के लोग मेडिकल कॉलेज पहुंचे तथा वहां पर उनके द्वारा विधि विधान से पूजा पाठ कर कर नृत्य किया गया एवं उनके अनुसार वह आत्मा को न्योता देकर वापस अपने साथ ले गए अब उनके द्वारा उसकी शांति प्रक्रिया की जाएगी तथा आदिवासी परंपरा के अनुसार उनका कहना था कि जिस स्थान से व्यक्ति की मृत्यु होती है वहीं पर जाकर उसकी आत्मा को शांति मिलती है। इस प्रकार के नजारे मेडिकल कॉलेज के अलावा जिला चिकित्सालय बाल चिकित्सालय में देखना आम बात है। आदिवासियों में इस पूरे कार्य को परंपरा माना जाता है तथा वह इस परंपरागत तरीके से करते हैं यही कारण है कि इन्हें कोई रोकता भी नहीं है। हालांकि आधुनिक दौर में इस प्रकार के अंधविश्वास की कहानी की कोई जगह दिखाई नहीं देती है परंतु परंपरा के नाम पर रतलाम जिले के आदिवासी अंचल में यह अभी भी कायम है। यही कारण है कि इस प्रकार के दृश्य रतलाम के जिला चिकित्सालय बाल चिकित्सालय मेडिकल कॉलेज में अक्सर देखने में आते हैं।
आवश्यकता है आदिवासी अंचल में जागरूकता अभियान चलाने की तथा आदिवासियों में इस प्रकार की परंपराओं को लेकर जागरूकता फैलाने की। इस संदर्भ में आदिवासी समाज के जागरूक शिक्षित तथा समाजसेवी लोगों का कहना है कि जागरूकता बहुत आवश्यक है तथा समय-समय पर इसके प्रयास किए जाते रहे हैं तथा वह आगे भी जारी रहेंगे।
नोट:- हमारी इस खबर का उद्देश्य किसी की परंपरा अथवा धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है। सिर्फ जागरूकता उत्पन्न करना है।
BYT मृतक के अंकल





