ब्रेकिंग
मध्यप्रदेश पुलिस के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को ‘केंद्रीय गृह मंत्री का वर्ष-2025 का अति-उत्कृष्ट ... राह चलती युवतियों पर हमला करने वाला सीरियल कटर बदमाश भोपाल पुलिस की गिरफ्त में... रतलाम ग्रामीण विकास की 62 लाख की सौगात... विधायक डॉ पांडेय के प्रयास से मिल रही निरन्तर स्वीकृतियां.... रतलाम प्रेस क्लब ने बनाया कीर्तिमान, म.प्र, छत्तिसगढ़ में बना पहला आईएसओ प्रमाणित प्रेस क्लब.... दिलावर का आतंक.... पुलिस का जन संवाद... एसपी ने बोला निर्भीक होकर शिकायतें दर्ज कराए... सुप्रीम कोर्ट के जज की टिप्पणियाँ और मीडिया की गलत व्याख्या ले रही है बेजुबानों की जान नशे का अवैध कारोबार...MD फैक्ट्री का खुलासा... पति-पत्नी बेटी दामाद सहित 16 गिरफ्तार.... नशे में वाहन चालक के द्वारा पुलिस कर्मियों एवं SI से झूमा झटकी... बदमाशों के हौसले बुलंद... पुलिस थाने के ठीक पीछे मारपीट का वीडियो वायरल.... रतलाम जिले में दर्दनाक हादसा तीन की मौत....
धार्मिक

जाने दशहरा पर अपराजिता, शमी, नीलकंठ, वाहन और शस्त्र पूजन का महत्व क्या है ? क्यों खाया जाता है पान, जलेबी और गिलकी का भजिया ?

कब है शारदीय नवरात्र की महाअष्टमी, नवमी एवं दशहरा की सही डेट एवं शुभ मुहूर्त ?

Publish Date: September 28, 2025

(www.csnn24.com) रतलाम आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक पर्व दशहरा (Dusshera Date 2025) मनाया जाता है। इस शुभ तिथि की शुरुआत 01 अक्टूबर को शाम 07 बजकर 02 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, दशमी तिथि का समापन 02 अक्टूबर को शाम 07 बजकर 10 मिनट पर होगा। इस प्रकार 02 अक्टूबर को दशहरा मनाया जाएगा। इस दिन भगवान श्रीराम की पूजा के लिए शुभ समय दोपहर 01 बजकर 18 मिनट से लेकर दोपहर 03 बजकर 40 मिनट तक है। वहीं, विजय मुहूर्त दोपहर 02 बजकर 05 मिनट से लेकर 02 बजकर 53 मिनट तक है।

शारदीय नवरात्र का त्योहार हर साल आश्विन महीने में धूमधाम से मनाया जाता है। यह पर्व जगत जननी आदिशक्ति देवी मां दुर्गा को समर्पित होता है। इस शुभ अवसर पर देवी मां दुर्गा और उनके नौ रूपों की भक्ति भाव से पूजा और सेवा की जाती है। साथ ही उनके निमित्त नौ दिनों तक व्रत रखा जाता है।

कब है अष्टमी ?

वैदिक पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 29 सितंबर को शाम 04 बजकर 32 मिनट पर होगी। वहीं, अष्टमी तिथि का समापन 30 सितंबर को शाम 06 बजकर 06 मिनट पर होगा। महाष्टमी का व्रत  30 सितंबर को रखा जाएगा। इस शुभ अवसर पर देवी मां दुर्गा का आह्वान किया जाएगा। साथ ही जगत जननी की विशेष पूजा की जाएगी।

कब है नवमी ?

आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि की शुरुआत 30 सितंबर को शाम 06 बजकर 07 मिनट पर होगी और 01 अक्टूबर को शाम 07 बजकर 01 मिनट पर समाप्त होगी। तिथि गणना के अनुसार, 01 अक्टूबर को महानवमी मनाई जाएगी। इस शुभ अवसर पर मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाएगी।

दशहरा का धार्मिक महत्व

पूर्वी भारत में दशहरे को दुर्गा पूजा और दुर्गा विसर्जन के रूप में मनाया जाता है। वहीं उत्तर भारत में इस दिन रामलीला और रावण दहन का आयोजन किया जाता है। दशहरा पर शहरशहर रावण, कुंभकरण और रावण के पुत्र मेघनाथ के पुतले का दहन करने का विधान है। यह एक बेहद ही शुभ त्योहार है और बुराई पर अच्छाई की जीत के जश्न के रूप में मनाया जाता है।

अपराजिता पूजा का महत्व

दशहरे के दिन उनकी पूजा करने से जीवन की सभी बाधाओं को दूर करने और जीत हासिल करने की शक्ति मिलती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान राम ने लंका पर आक्रमण करने से पहले देवी अपराजिता की पूजा की थी और उनके आशीर्वाद से रावण को पराजित किया।

शस्त्र पूजन का महत्व

दशहरे के दिन शस्त्र पूजन की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है।  माना जाता है कि शस्त्रों की पूजा करने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है।  यह परंपरा रामायण के समय से चली आ रही है, जब भगवान राम ने लंका पर आक्रमण करने से पहले अपने शस्त्रों की पूजा की थी। इतिहास में भी यह परंपरा देखी गई है। छत्रपति शिवाजी महाराज ने इसी दिन मां भवानी से आशीर्वाद प्राप्त कर भवानी तलवार हासिल की थी। आज भी, भारतीय सेना दशहरे के दिन अपने शस्त्रों की पूजा करती है।

शमी पूजन क्यों करते हैं?

शमी में शनि ग्रह का वास माना जाता है और प्राचीन मान्यताओं के अनुसार जब शनि प्रतिकूल होता है, तो शमी के वृक्ष का पूजन करने से जीवन में आने वाली कठिनाइयों और संघर्षों में अनुकूलता आती है। शनि कर्म के अनुसार फल देते हैं और प्रतिदिन शमी के वृक्ष का पूजन करने से उनके प्रभाव से होने वाले दोषों से मुक्ति मिलती है।

स्कंद पुराण और महाभारत में वर्णन मिलता है कि भगवान श्रीराम ने लंका पर आक्रमण से पहले शमी के वृक्ष की पूजा कर विजय प्राप्त करने की प्रार्थना की थी। विजय प्राप्ति के बाद उन्होंने अयोध्या में शमी की पत्तियों का दान देकर लोगों में खुशहाली और समृद्धि का प्रतीक स्थापित किया। महाभारत काल में पांडवों ने वनवास के दौरान अपने अस्त्र-शस्त्र शमी के वृक्ष में सुरक्षित रखे थे और पुनः प्राप्त कर युद्ध में विजयी हुए। इस प्रकार शमी का पेड़ केवल एक पौधा नहीं, बल्कि शौर्य, शांति और पौराणिक कथाओं का प्रतीक बन गया है, जो भारतीय संस्कृति में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

दशहरे पर नीलकंठ पक्षी का महत्व

दशहरे के दिन नीलकंठ पक्षी का दिखना अत्यंत शुभ माना जाता है क्योंकि यह विजय प्राप्ति का प्रतीक है |

दशहरा पर वाहन पूजा

दशहरा या विजयादशमी पर वाहन पूजा करने का महत्व भगवान राम द्वारा अपने रथ और शस्त्रों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने की परंपरा से जुड़ा है। यह पूजा सुरक्षित यात्रा, समृद्धि और किसी भी नए कार्य में सफलता सुनिश्चित करती है। लोग इसे अपने वाहन के प्रति आभार और सम्मान के प्रतीक के रूप में भी करते हैं।

दशहरा के दिन पान, जलेबी और गिलकी के भजिये खाने का महत्व

ये चीजें न केवल स्वादिष्ट होती हैं, बल्कि इनका अपना अलग-अलग महत्व भी है:

1. पान: पान को शुभ माना जाता है और यह एक तरह का सम्मान और आभार का प्रतीक है। दशहरा के दिन पान खाने से घर में समृद्धि और खुशहाली आती है, ऐसा माना जाता है।

2. जलेबी: जलेबी एक मिठाई है जो खुशी और उत्सव का प्रतीक है। दशहरा के दिन जलेबी खाने से घर में खुशी और समृद्धि आती है, और यह दिन की खुशी को और भी बढ़ाता है।

3. गिलकी के भजिये: गिलकी के भजिये एक लोकप्रिय व्यंजन है जो दशहरा जैसे त्योहार के लिए आदर्श हैं। इनका स्वाद और इनका त्योहार के साथ जुड़ाव इन्हें और भी विशेष बनाता है।

इन चीजों को दशहरा के दिन खाने का महत्व इसलिए भी है क्योंकि ये परंपरा और संस्कृति का हिस्सा हैं। ये चीजें हमें अपने पूर्वजों से जुड़ी हुई हैं और हमें अपनी संस्कृति और परंपराओं को समझने और उनका सम्मान करने का मौका देती हैं।

Show More

Sheemon Nigam

Chief Editor csnn24.com | BJMC +MJMC | Artist by Passion, Journalist by Profession | MD of Devanshe Enterprises, Video Editor of Youtube Channel @buaa_ka_kitchen and Founder of @the.saviour.swarm | Freelance Zoophilist, Naturalist & Social Worker. Podcastor and Blogger | Fresh Experience as Anchor, Content creator and Editor in Media Industry | CACT AWBI & Member of PFA India, Peta India and PAL Foundation Mumbai.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Don`t copy text!