धार्मिक
Ganesha Visarjan 2025 : अनंत चतुर्दशी 6 सितंबर 2025 को…
अनंत चतुर्दशी और गणेश विसर्जन का आपस में गहरा संबंध है !

Publish Date: September 5, 2025
www.csnn24.com | अनंत चतुर्दशी भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा-अर्चना की जाती है। ‘अनंत’ का अर्थ है—जिसका कोई अंत नहीं। शास्त्रों में बताया गया है कि अनंत चतुर्दशी के दिन व्रत रखने और अनंत सूत्र (कुश के धागे में 14 गांठ बांधकर) धारण करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। अनंत चतुर्दशी की कथा के अनुसार, पांडवों ने भी इस व्रत का पालन कर अपने दुख और संकटों को दूर किया था। यह व्रत व्यक्ति को वैभव, धन-धान्य और सौभाग्य प्रदान करता है। यह दिन भगवान विष्णु और गणपति दोनों की कृपा प्राप्त करने का अवसर प्रदान करता है। एक ओर यह व्रत जीवन में अनंत सुख और समृद्धि का मार्ग खोलता है, तो दूसरी ओर गणपति विसर्जन हमें जीवन की अनित्यता और आस्था की अनंतता का संदेश देता है।
धार्मिक मान्यता
- गणेश और विष्णु की आराधना का संयोग – अनंत चतुर्दशी पर भगवान विष्णु की पूजा का विधान है, जबकि उसी दिन गणेशजी का विसर्जन किया जाता है। इसे देवताओं के बीच दिव्य समन्वय का प्रतीक माना गया है।
- विघ्नों का अंत – मान्यता है कि गणेश उत्सव के दौरान बप्पा घर और समाज में रहकर सभी विघ्नों को हर लेते हैं। अनंत चतुर्दशी को उनके विसर्जन के साथ ही भक्त अपने जीवन से दुख और संकटों को विदा कर देते हैं।
- आगमन और प्रस्थान का संदेश – गणपति बप्पा का चतुर्थी को आगमन और चतुर्दशी को विसर्जन यह दर्शाता है कि जीवन में हर शुरुआत का एक अंत होता है, लेकिन आस्था और विश्वास अनंत होते हैं।
- पंचतत्व में विलय – गणेश विसर्जन का धार्मिक आधार यह भी है कि मूर्ति जल में समर्पित कर हम यह स्वीकार करते हैं कि सृष्टि पंचतत्व से बनी है और अंततः उसी में लीन हो जाती है।
गणेश विसर्जन शुभ मुहूर्त
- सुबह 07 बजकर 36 से सुबह 09 बजकर 10 मिनट तक
- दोपहर 12 बजकर 17 बजे से शाम 04 बजकर 59 बजे तक।
- सायाह्न मुहूर्त (लाभ) – शाम 06 बजकर 37 बजे से रात 08 बजकर 02 बजे तक
- रात्रि मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर) – रात 09 बजकर 28 बजे से 01 बजकर 45 बजे तक, 7 सितंबर 2025
- उषाकाल मुहूर्त (लाभ) – सुबह 04 बजकर 36 बजे से 06 बजकर 02 बजे तक, 7 सितंबर 2025।
अनंत चतुर्दशी की पूजा विधि
- सूर्योदय से पहले उठकर नित्य कामों से निवृत्त होकर स्नान कर लें। इसके बाद स्वच्छ वस्त्र धारण
करें।फिर व्रत का संकल्प लें और भगवान विष्णु का ध्यान करें। अब पूजा आरंभ करें। - सबसे पहले एक चौकी में में पीला वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
- इसके साथ ही तांबा या पीतल का कलश, घी का दीपक सहित अन्य सामग्री रख लें।
- अनंत सूत्र (धागा) की तैयारी कर लें। इसके लिए एक कच्चे धागे में 14 गांठ लगाएं और इसे हल्दी और
केसर से रंग लें। - अब पूजा आरंभ करें। भगवान विष्णु को जल, फूल, माला, चंदन, अक्षत,तुलसीदल, फल और भोग
अर्पित करें। - इसके साथ ही अनंत सूत्र अर्पित करें। इसके बाद घी का दीपक जला लें।
- विष्णु सहस्रनाम या अनंत व्रत कथा का पाठ करें।
- अंत में विष्णु जी की आरती करके भूल चूक के लिए माफी मांग लें।
- दिनभर व्रत रखें और शाम को पूजा के साथ व्रत का समापन कर लें।




