सुप्रीम कोर्ट का आदेश विवादों में: दिल्ली-एनसीआर से इंडी स्ट्रीट डॉग्स हटाने के फ़ैसले पर पुरे देश में बढ़ा विरोध
डॉग लवर्स के लिए अच्छी खबर, CJI बोले- फैसले पर कर सकते हैं पुनर्विचार

www.csnn24.com| नई दिल्ली | सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली-एनसीआर की सड़कों से सभी इंडी स्ट्रीट डॉग्स को हटाने और उन्हें पाउंड में बंद करने के आदेश ने देशभर में बहस छेड़ दी है। एनिमल फीडर्स, पशु अधिकार कार्यकर्ता और कई सामाजिक संगठनों ने इस फ़ैसले को “अमानवीय, अव्यावहारिक और क्रूर” बताते हुए इसका विरोध शुरू कर दिया है। अब मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई ने इस निर्देश पर पुनर्विचार का आश्वासन दिया है, जिससे पशु प्रेमियों को उम्मीद जगी है। बड़ी संख्या में लोग सड़कों और गलियों से कुत्तों के हटाए जाने पर असहमत थे। दिल्ली के साथ मुंबई में भी व् अन्य जगह पर भी इसको लेकर लोग प्रदर्शन कर रहे थे।
“असली समस्याओं से ध्यान भटकाना”
विरोध कर रहे संगठनों का कहना है कि देश में बाल कुपोषण, बेरोज़गारी, महिलाओं की सुरक्षा, कचरा निपटान और प्रदूषण जैसे असंख्य गंभीर मुद्दे हैं, लेकिन अचानक इंडी स्ट्रीट डॉग्स को “राष्ट्रीय आपातकाल” बना दिया गया है।
स्ट्रीट डॉग्स — दुश्मन नहीं, रक्षक
स्थानीय लोगों का मानना है कि इंडी कुत्ते केवल “आवारा जानवर” नहीं, बल्कि मोहल्लों के पहरेदार हैं। ये अक्सर दुकानदारों, कॉलोनी वासियों और राहगीरों से रोज़ मिलते हैं और कई बार अजनबियों से सतर्क भी करते हैं। “ये वही कुत्ते हैं जो आपके एक बिस्कुट के लिए दिनभर इंतज़ार करते हैं और रात में आपकी गली की रक्षा करते हैं,” एक एनिमल फीडर ने कहा।

आंकड़े बताते हैं अलग तस्वीर
एक तर्क है कि 2024 में पूरे भारत में डॉग बाइट से केवल 54 मौतें हुईं, जबकि सड़क हादसों में यह संख्या लाखों में है। उनका कहना है कि समाधान कुत्तों को कैद करना नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर नसबंदी, टीकाकरण और समुदाय-आधारित देखभाल है।

पाउंड में बंद करना — धीमी मौत ?
एनजीओ का कहना है कि लाखों कुत्तों को सीमित जगहों पर रखना असंभव और खतरनाक है। पाउंड में लड़ाई, बीमारियों का फैलाव, भोजन की कमी और मानसिक तनाव के कारण यह कदम जानवरों के लिए “धीमी मौत” साबित होगा। इसके अलावा, इतने बड़े स्तर पर भोजन, चिकित्सा और देखभाल की व्यवस्था करना प्रशासन के लिए लगभग असंभव है।
भ्रष्टाचार और लापरवाही का इतिहास
पशु प्रेमियों ने यह भी याद दिलाया कि पहले शुरू हुए नसबंदी और टीकाकरण कार्यक्रम भ्रष्टाचार और निगरानी की कमी के कारण विफल हो चुके हैं। कई नसबंदी केंद्र बंद पड़े हैं और टेंडर के पैसे हज़म हो गए। ये पुरे देश में हुआ है केवल दिल्ली में ही नहीं , जिसकी मॉनिटरिंग नहीं की गयी !

असली समाधान क्या है?
- पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने सरकार से मांग की है कि—
- बड़े पैमाने पर नसबंदी और टीकाकरण अभियान चलाए जाएँ
- सामुदायिक आहार क्षेत्र बनाए जाएँ
- गोद लेने के कार्यक्रम शुरू हों
- एनिमल फीडर्स और पशु अधिकार कानूनों को सख़्ती से लागू किया जाए
ABC नियमों और AWBI गाइडलाइंस के खिलाफ
पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश Animal Birth Control (ABC) Rules, BMC Guidelines और Animal Welfare Board of India (AWBI) Rules and Annexures के विपरीत है। इन मौजूदा नियमों के तहत स्ट्रीट डॉग्स को उनकी मूल जगह से हटाना, बिना नसबंदी और टीकाकरण के विकल्प दिए, गैर-कानूनी और अन्यायपूर्ण है। इन नियमों का मकसद कुत्तों की आबादी को मानवीय तरीके से नियंत्रित करना और उन्हें उनके परिचित इलाके में रहने देना है।
सोशल मीडिया पर अभियान
फ़ैसले के विरोध में सोशल मीडिया पर हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। कई सेलिब्रिटीज़ और एक्टिविस्ट इस आदेश को “करुणा और इंसानियत पर हमला” बता रहे हैं और लोगों से ऑनलाइन पिटीशन साइन करने, पोस्ट शेयर करने और स्थानीय प्रशासन को मेल करने की अपील कर रहे हैं। इस आदेश का विरोध सिर्फ़ सामाजिक कार्यकर्ताओं तक सीमित नहीं है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और पशु अधिकार कार्यकर्ता मेनका गांधी ने इसे “भारत की करुणा और पशु कल्याण की परंपरा पर हमला” बताया। अभिनेता जॉन अब्राहम ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि “सड़क के कुत्तों को कैद करना समाधान नहीं, बल्कि एक क्रूरता है, वो भी दिल्ली रहवासी है । कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को दिल्ली-एनसीआर के इलाकों से सभी आवारा कुत्तों को हटाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश की आलोचना की और इसे “दशकों से चली आ रही मानवीय नीति से एक कदम पीछे” बताया। श्री गांधी ने “बेजुबान आत्माओं” के लिए आवाज़ उठाई और कहा कि यह कदम “क्रूर” है, जो “लोगों की करुणा को खत्म कर देता है”। इनके अलावा प्रियंका गांधी वाड्रा, वरुण गांधी , वरुण धवन, कपिल देव ,जाया भट्टाचार्य , रूपा गांगुली, परिवा प्रणति , भूमिका गुरुंग, कई अन्य कलाकार और सार्वजनिक हस्तियां भी इस फैसले के खिलाफ खुलकर सामने आ रही हैं।
वहीं, पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (PETA) इंडिया, पीपल फॉर एनिमल्स (PFA), PAL फाउंडेशन मुंबई , व अन्य छोटी बड़ी सभी एनिमल वेलफेयर संस्थाओ ने इस फैसले को ‘अव्यावहारिक, अवैज्ञानिक और अवैध’ करार दिया.

कुत्तों के आक्रामक होने और काटने के मामलों की असली सच्चाई – इंसान का गलत व्यव्हार
डॉग लवर्स और एक्टिविस्ट का कहना है की ये एक तरफ़ा फैसला है, भारत में डॉग एग्रेसन और डॉग बाइट केस के पीछे की असली सच्चाई सुप्रीम कोर्ट शायद नहीं देख पाएगा — वही सुप्रीम कोर्ट जिसने हाल ही में बच्चों की सुरक्षा का हवाला देकर यह अव्यावहारिक फैसला सुनाया है। सवाल यह है कि क्या इन बच्चों और लोगो को सुरक्षा चाहिए जो इन कुत्तो को बेवज़ह मारते है या उन मासूम, बेज़ुबान आत्माओं को, जो खुद बोल भी नहीं सकते, अपने आप को प्रूफ नहीं कर सकते ? इन्हीं बच्चों के माता-पिता तब पुलिस और कोर्ट में केस करने पहुँच जाते हैं जब किसी कुत्ते या अन्य जानवर ने उनके क्रूर व्यवहार का जवाब दिया हो ! यानि एक्शन का रिएक्शन !
अगर सुप्रीम कोर्ट सच में पूरे भारत के हर एनिमल वेलफेयर पेज पर जाकर देखे, तो उन्हें पशु क्रूरता के अनगिनत मामले मिलेंगे — लेकिन यह सच्चाई न पक्षपाती अख़बार दिखाते हैं, न बड़े पोर्टल्स, न नेशनल टीवी चैनल। क्या सुप्रीम कोर्ट ऐसे मामलों पर भी एक्शन लेगा? क्या उनके पास इतनी हिम्मत है कि इस कहानी का दूसरा पहलू भी देख सकें ?
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निष्कर्ष – मामले में आज तीन जजों की स्पेशल बेंच करेगी सुनवाई !
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में आवारा कुत्तों को हटाने के विवादित आदेश पर सुनवाई के लिए नया तीन जजों का विशेष पीठ गठित किया है, जिसमें जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया शामिल हैं| यह पीठ 14 अगस्त को सुनवाई करेगी| इससे पहले 11 अगस्त के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने सभी आवारा कुत्तों को पकड़कर नसबंदी, टीकाकरण कर स्थायी रूप से शेल्टर में रखने का निर्देश दिया था और 6-8 हफ्तों में 5,000 कुत्तों से शुरुआत करने को कहा था |
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश अभी लागू नहीं हुआ है, लेकिन पशु प्रेमियों का मानना है कि अगर इसे बिना मानवीय विकल्पों के लागू किया गया, तो यह न केवल इंडी स्ट्रीट डॉग्स की ज़िंदगी के लिए खतरा होगा, बल्कि भारत की दया और करुणा की परंपरा को भी ठेस पहुँचाएगा। जिस देश में गौतम और गाँधी की बाते हो , दया, करुणा और धर्म कर्म को महत्व दिया जाता हो वो ये मिसाल कायम करेगा की हमें अपने भारतीय कुत्तो को पालने में शर्म आती है , हमने उन्हें कैद कर लिया है ! साथ ही इस फैसला का पूर्ण विरोध करते हुए लोगो ने कहा है की इसके कारण दिल्ली में रेप , चोरी जैसी घटनाएं बढ़ेगी साथ ही इसका असर पुरे देश में होगा | इससे एनिमल हेटर को बढ़ावा मिलेगा जो इनपर अत्याचार करते हैं ! अब देखना ये है की मानव मूल्यों को देखते हुए भारी विरोध के बाद क्या बदलेगा सुप्रीम कोर्ट का फैसला ?




